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शहरी सततता को बढ़ावा: विश्व मृदा दिवस पर यूएचएफ नौणी ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व को किया रेखांकित

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World Soil Day
यूएचएफ नौणी विश्वविद्यालय ने विश्व मृदा दिवस पर शहरी सततता के लिए मृदा स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में छात्रों को मृदा विश्लेषण, शहरी वानिकी, कम्पोस्टिंग और वर्षा जल संचयन जैसी सतत प्रथाओं के प्रति जागरूक किया गया।

हिमाचल समय, सोलन, 05 दिसंबर ।

पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में स्वस्थ मृदा की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में विश्व मृदा

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दिवस मनाया। इस वर्ष विश्व मृदा दिवस का थीम ‘स्वस्थ मृदा—स्वस्थ शहर’ रहा। इस अवसर पर विभाग द्वारा छात्रों में मृदा स्वास्थ्य के महत्व तथा संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में इसकी भूमिका के प्रति समझ बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

थीम की व्याख्या करते हुए मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उदय शर्मा ने बताया कि इस वर्ष का विषय केवल कृषि या ग्रामीण क्षेत्रों ही नहीं, बल्कि शहरी परिदृश्य में मृदा के महत्व पर विशेष बल देता है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ शहरी मृदा वर्षाजल को अवशोषित करने, बाढ़ प्रबंधन, कार्बन भंडारण, तापमान नियंत्रण, जल शोधन, वायु गुणवत्ता सुधार तथा हरित क्षेत्रों एवं जैव विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि यह थीम शहरी नियोजकों, नीति-निर्माताओं, समुदायों और नागरिकों से अपील करती है कि शहरों के विकास और डिजाइन में मृदा स्वास्थ्य और सतत भूमि उपयोग को प्राथमिकता दी जाए।

पूर्वाह्न सत्र में, विभाग ने स्नातक छात्रों के लिए विश्वविद्यालय की एनएबीएल-मान्यता प्राप्त उन्नत मृदा एवं पत्ती विश्लेषण प्रयोगशाला का शैक्षणिक दौरा आयोजित किया। इस दौरे का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न मृदा मापदंडों तथा मृदा विश्लेषण में प्रयुक्त उपकरणों से परिचित करवाना था। विभाग के वैज्ञानिक डॉ. उदय शर्मा, डॉ. राजेश कौशल, डॉ. सुधीर वर्मा और डॉ. उपेंद्र शर्मा ने छात्रों को स्वस्थ मृदा बनाए रखने में शहरी वानिकी और बागवानी के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने रसोई के कचरे को उपयोगी खाद में परिवर्तित कर पौधों और मृदा सुधार में उपयोग करने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला।

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दोपहर में डॉ. प्रदीप कुमार ने स्नातकोत्तर छात्रों के लिए एक सत्र का संयोजन किया। इस सत्र में छात्रों के लिए एक एक्सटेम्पोर (तात्कालिक भाषण) गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें जिम्मेदार कम्पोस्टिंग, शहरी जल संचयन और टैरेस गार्डन में प्राकृतिक खेती जैसे विषय दिए गए। इस गतिविधि का उद्देश्य छात्रों में सतत शहरी प्रथाओं के प्रति क्रिटिकल सोच और जागरूकता को प्रोत्साहित करना था।

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