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युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना चाहिए : बाहरा विश्वविद्यालय में 200 प्रतिभागियों ने लिया उद्यमिता का मंत्र

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भावना ठाकुर,

05 नवंबर / सोलन।

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युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजन करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बाहरा विश्वविद्यालय, वाकनाघाट में बुधवार को एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (एमएसएमई-डीएफओ), सोलन की ओर से राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। बाहरा विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 200 विद्यार्थियों और उद्यमियों ने भाग लिया। सेमिनार में 11 संस्थानों के विशेषज्ञों और दो सफल उद्यमियों ने युवाओं को उद्यमिता, स्टार्टअप, वित्तीय सहायता, सरकारी योजनाओं और निर्यात से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

बाहरा विश्वविद्यालय के चेयरमैन सरदार गुरविंदर सिंह बहरा ने कार्यक्रम की सफलता पर आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उद्यमिता के माध्यम से युवा न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रयासरत है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रिश पाल नैंटा ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए उद्यमिता एक बेहतर करियर विकल्प बनकर उभर रही है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, कौशल और नए विचारों का उपयोग कर व्यवसाय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सरकारी योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी लेकर अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविकता में बदलने का आह्वान किया।

कुलसचिव एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी श्री विनीत कुमार ने कहा कि उद्यमिता युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ एमएसएमई-डीएफओ सोलन की सहायक निदेशक ग्रेड-II (आईईडीएस) एवं कार्यक्रम समन्वयक सुश्री गोकुल देवी ई के स्वागत संबोधन से हुआ। कार्यालय प्रमुख श्री ए.के. गौतम (आईईडीएस) ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के निदेशक छात्र कल्याण श्री अनुराग अवस्थी और मीडिया एवं संचार प्रमुख श्री गौरव बाली उपस्थित रहे। श्री अवस्थी ने विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र भी लिया।

बैंकों और सरकारी संस्थानों के विशेषज्ञों ने दी जानकारी

सेमिनार में सिडबी के सहायक महाप्रबंधक श्री गोपी नम्मी, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रबंधक श्री राहुल जोशी और पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक श्री महेश सिंह ने उद्यम शुरू करने के लिए ऋण एवं वित्तीय सहायता की जानकारी दी। भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (FIEO) के उप निदेशक श्री विनय शर्मा ने निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सलाहकार श्री अमित कश्यप ने गुणवत्ता मानकों, ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री अनिल चौहान ने कर्मचारी भविष्य निधि तथा सीजीएसटी के अपर आयुक्त श्री सिद्धार्थ जायसवाल ने जीएसटी एवं कर अनुपालन से संबंधित जानकारी दी। वहीं, जेम के प्रशिक्षक श्री रवि वर्मा ने सरकारी खरीद प्रक्रिया, एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र बद्दी के उप महाप्रबंधक श्री सुखमन सिंह ने तकनीकी सहयोग और जिला उद्योग केंद्र के प्रबंधक श्री विनय वर्मा ने उद्योग स्थापना एवं सरकारी योजनाओं के बारे में बताया।

सफल उद्यमियों ने विद्यार्थियों से साझा किया अनुभव

कार्यक्रम में मिंचीज (Minchy’s) के संस्थापक एवं सीईओ श्री गिरीश मिनोचा और ग्लाइड इन (Glide Inn) के श्री अरुण रावत ने अपने उद्यमिता के सफर और कारोबार शुरू करने के दौरान आई चुनौतियों के अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना और उन्हें स्वरोजगार के साथ रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार करना रहा। कार्यक्रम का समापन एमएसएमई-डीएफओ सोलन के सहायक निदेशक ग्रेड-I (आईईडीएस) श्री अभिषेक कुमार राय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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