भावना ठाकुर,
04 नवंबर / सोलन।
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा स्टांप ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी की भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी निंदा की है। भाजपा जिला सोलन के प्रवक्ता अभिषेक ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2023 में भी स्टांप ड्यूटी में कई गुना वृद्धि की थी और अब वर्ष 2026 में एक बार फिर विभिन्न कानूनी दस्तावेजों पर शुल्क बढ़ाकर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एफिडेविट, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी सहित रोजमर्रा के कानूनी कार्यों में इस्तेमाल होने वाले दस्तावेजों को भी महंगा कर दिया है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2023 से पहले 10 रुपये के स्टांप पर बनने वाला एफिडेविट पहले 20 रुपये किया गया और अब उसकी स्टांप ड्यूटी 100 रुपये कर दी गई है। इसी प्रकार एसपीए की संबंधित सामान्य श्रेणी की ड्यूटी 100 रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2023 में 1,000 रुपये और अब 3,000 रुपये कर दी गई है, जबकि जीपीए की संबंधित श्रेणी में यह 150 रुपये से बढ़कर पहले 1,500 रुपये और अब 4,000 रुपये हो गई है।

अभिषेक ठाकुर ने स्पष्ट किया कि पावर ऑफ अटॉर्नी केवल संपत्ति के मालिकाना हक के हस्तांतरण के लिए ही नहीं बनाई जाती, बल्कि आम नागरिक अपने पारिवारिक, व्यक्तिगत, प्रशासनिक और कानूनी कार्यों के लिए भी साधारण एसपीए और जीपीए बनवाते हैं। किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति में उसके स्थान पर दस्तावेज प्रस्तुत करने, संबंधित कार्यालय में कार्यवाही करने अथवा किसी विशेष कार्य के लिए अधिकार देने जैसे सामान्य मामलों में भी इनकी आवश्यकता पड़ती है। ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी में संपत्ति का मालिकाना हक हस्तांतरित नहीं होता, फिर भी संबंधित श्रेणी के अनुसार बढ़ी हुई स्टांप ड्यूटी का भुगतान करना पड़ता है। इसलिए सरकार की इस बढ़ोतरी का असर केवल बड़े संपत्ति लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामान्य नागरिकों के छोटे-छोटे कानूनी कार्यों पर भी पड़ेगा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार की आर्थिक बदहाली और वित्तीय कुप्रबंधन का बोझ अब लगातार आम जनता पर डाला जा रहा है। सरकार अपनी वित्तीय व्यवस्था को सुधारने, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण करने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय जनता से अधिक राजस्व वसूलने के रास्ते अपना रही है। यह सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार जिस व्यवस्था परिवर्तन का दावा करके सत्ता में आई थी, आज उसकी नीतियों और फैसलों से व्यवस्था परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था पतन दिखाई दे रहा है। सरकार को जनता की कानूनी और प्रशासनिक जरूरतों को सुलभ बनाना चाहिए, न कि उन्हें महंगा करके नागरिकों की परेशानियां बढ़ानी चाहिए।
अभिषेक ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की कि सामान्य एफिडेविट, बिना मालिकाना हक हस्तांतरण वाली साधारण स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी सहित दैनिक उपयोग में आने वाले अन्य कानूनी दस्तावेजों पर स्टांप ड्यूटी की दरों में विशेष छूट प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व जनता को राहत देना है, न कि हर छोटे कानूनी कार्य को महंगा बनाकर जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालना।








