भूपेंद्र ठाकुर,
29 अक्टूबर / शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने दूध प्रोत्साहन योजना में बढ़ोतरी को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत पात्र दूध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 3 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यह निर्णय बजट घोषणा के अनुरूप लिया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को आजीविका के एक स्थायी साधन के रूप में बढ़ावा देना है।

संशोधित योजना के अंतर्गत प्रदेश की पात्र गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध की आपूर्ति करने वाले दूध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 6 रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना के लिए सरकार ने 14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
प्रदेश सरकार दूध उत्पादकों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने तथा दूध की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन संबंधी अधोसंरचना को बेहतर बनाने के लिए डेयरी क्षेत्र को सशक्त करने के उद्देश्य से कई कदम उठा रही है।
हालांकि, निजी डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े दूध उत्पादकों को इन संस्थानों की वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण समान प्रोत्साहन सहायता नहीं मिल पा रही थी। इस असमानता को दूर करने और ऐसे उत्पादकों को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने दूध प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। शुरूआत में इसके तहत 3 रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही थी जिसे अब बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ और कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि दूध प्रोत्साहन राशि में वृद्धि से गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े पात्र दूध उत्पादकों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी और प्रदेश की डेयरी विकास पहलों का लाभ किसानों के अधिक व्यापक वर्ग तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों के साथ-साथ डेयरी फार्मिंग को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और लाभकारी बनाने पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दूध उत्पादन बढ़ाने, सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने तथा दूध एवं दुग्ध उत्पादों की खरीद और विपणन व्यवस्था में सुधार के लिए किसान हितैषी योजनाएं निरंतर जारी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि इन नीतिगत प्रयासों का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, गांवों में रोजगार के अवसर सृजित करना और हिमाचल प्रदेश में समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। दूध प्रोत्साहन राशि में की गई यह वृद्धि किसानों से किए गए वायदों को पूरा करने और एक मजबूत, आत्मनिर्भर तथा समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती है।








