भूपेंद्र ठाकुर,
23 अक्टूबर / शिमला।
हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित ऑडिट समिति की रिपोर्ट में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर तत्कालीन एसएसपी शिमला संजीव गांधी के विरुद्ध पुलिस थाना शिमला में एफआईआर संख्या 139/2026, दिनांक 22.10.2026, धारा 316(5) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों एवं जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए आवंटित लगभग ₹1.28 करोड़ के खर्च में वित्तीय अनियमितता पाई गई।

इसमें से ₹14,07,392 तत्कालीन एसएसपी के अपने सरकारी आवास ‘साउथवुड’ पर खर्च किए जाने दर्शाए गए, जबकि इस आवास की मरम्मत के लिए न तो सरकार और न ही पुलिस मुख्यालय ने कोई अलग बजट स्वीकृत किया था। संबंधित कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे तथा सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति और आवश्यक स्वीकृतियों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाए गए।
ऑडिट में सामने आया कि रामपुर के एसडीपीओ आवास के लिए स्वीकृत ₹2.80 लाख की धनराशि संबंधित आवास की मरम्मत के बजाय तत्कालीन एसएसपी के शिमला स्थित सरकारी आवास पर खर्च दर्शाई गई। इसी प्रकार शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित ₹2.50 लाख की राशि भी फरवरी 2023 में कार्य पूरा होने का हवाला देकर वापस प्राप्त की गई और तत्कालीन एसएसपी के आवास पर खर्च दर्शाई गई, जबकि ऑडिट में शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने के प्रमाण नहीं मिले। वर्ष 2023-24 में ₹1.62 लाख तथा 2024-25 में ₹7.22 लाख तत्कालीन एसएसपी के आवास पर खर्च दर्शाए गए, जबकि इन कार्यों के लिए आवश्यक पूर्व स्वीकृति एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। वर्ष 2025-26 में ₹28.67 लाख के बजट के अंतर्गत प्रस्तावित 50 कार्यों में से 22 कार्य किए जाने का रिकॉर्ड मिला, जिनमें 13 कार्य स्वीकृत मूल प्रस्ताव से बाहर के थे। ऑडिट समिति ने स्वीकृत प्रस्तावों से अलग कार्यों पर धनराशि खर्च किए जाने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट के अनुसार यह विशेष रूप से चिंताजनक है कि एक ओर पुलिस जवानों के आवासों और कार्यस्थलों की आवश्यक मरम्मत के लिए धन की आवश्यकता थी, वहीं दूसरी ओर उसी मद की लाखों रुपये की धनराशि तत्कालीन एसएसपी के अपने सरकारी आवास पर खर्च दर्शाई गई। शोघी पुलिस पोस्ट आज भी एक कंटेनर में संचालित हो रही है, जहां पुलिस कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऑडिट में संबंधित खर्चों के पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण यह भी जांच का विषय है कि दर्शाई गई धनराशि वास्तव में किन कार्यों पर खर्च हुई और क्या निर्धारित वित्तीय नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
सरकारी धन का प्रत्येक रुपया जनता की अमानत है। विशेषकर पुलिस जवानों के कल्याण और उनकी बुनियादी सुविधाओं के लिए निर्धारित धनराशि का किसी अन्य उद्देश्य के लिए बिना स्वीकृति इस्तेमाल किया जाना गंभीर मामला है। रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के आधार पर उनके विरुद्ध धारा 316(5) भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक विश्वासघात करके सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।






