Home अध्यात्म गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल कुनिहार में दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया

गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल कुनिहार में दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया

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भावना ठाकुर,

19 अक्टूबर / कुनिहार।

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गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, कुनिहार में दशहरा उत्सव हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दशहरे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया गया। विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान कक्षा दूसरी के विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम और रावण की कथा तथा कविता के माध्यम से दशहरे के महत्व को प्रस्तुत किया। कक्षा छठी के विद्यार्थियों ने “क्या आज के समय में रावण के पुतले का दहन प्रासंगिक है?” विषय पर भाषण प्रतियोगिता (Declamation) में भाग लेते हुए अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, कक्षा नौवीं और दसवीं के विद्यार्थियों ने इसी विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से अपने तर्क प्रस्तुत किए और वर्तमान समाज में अच्छाई एवं बुराई के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

कक्षा सातवीं और आठवीं की छात्राओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत कठपुतली शो रहा, जिसमें भगवान श्रीराम और रावण की कथा को रोचक एवं प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।

कार्यक्रम के समापन पर रावण के पुतले का दहन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने संगीत की धुनों पर नृत्य करते हुए उत्सव का आनंद लिया और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश आत्मसात किया।

प्रधानाचार्या अलका भारद्वाज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का अवसर भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस दशहरे पर अपने भीतर की किसी एक नकारात्मक आदत को त्यागने का संकल्प लें और स्वयं को एक बेहतर इंसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएँ।

विद्यालय के निदेशक मंडल ने अपने संदेश में कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच अंतर समझने, नैतिक मूल्यों को अपनाने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि सच्चा दशहरा तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकताओं को दूर कर अच्छाई, सत्य और सदाचार को अपनाने का प्रयास करेगा।

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