भावना ठाकुर,
03 सितंबर / सोलन।
हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रमुख फल मंडियों में शुमार सोलन फल मंडी में इस वर्ष (2026) सेब का कारोबार बीते वर्ष 2025 की तुलना में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सेब की आवक में 62% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं कारोबार भी करीब 55% लुढ़क गया है। यह आँकड़े प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

आँकड़े बयाँ करते हैं दर्दनाक हकीकत
पिछले साल जहाँ कारोबार 173 करोड़ रुपये के पार था, वहीं इस साल यह घटकर मात्र 77.74 करोड़ रुपये पर आ गया है। यानी इस बार का कुल कारोबार पिछले साल के आधे से भी कम रह गया है। स्थानीय व्यापारियों और बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, सोलन मंडी में सेब की कम आवक के पीछे कई बड़े कारण हैं।
हिमाचल में मौसम का कहर: इस साल फूल आने (बसंत ऋतु) और फल बनने (गर्मियों) के समय प्रदेश में भारी ओलावृष्टि, पाले का प्रकोप और असामान्य बारिश हुई। इससे कोटखाई, शिमला, किन्नौर और आसपास के इलाकों में फसल बुरी तरह बर्बाद हो गई, जिसका सीधा असर सोलन मंडी की आवक पर पड़ा। मौसम की मार झेलने के कारण इस बार जो सेब आए भी हैं, उनका साइज़ (आकार) और ग्रेड पिछले साल से कम है। छोटे आकार के सेबों की बिक्री में व्यापारियों को खासी मुश्किल आ रही है।
“पिछले साल (2025) इस समय मंडी में सेब से भरी गाड़ियों की कतारें लगी होती थीं, पर इस बार मंडी सूनी पड़ी है। आवक इतनी कम है कि कारोबारियों का रोजगार ही खतरे में है। जो माल आया भी है, उसके दाम तो अच्छे चल रहे हैं, पर माल की कमी के कारण कुल कमाई बेहद कम हो गई है।” एक अन्य व्यापारी के अनुसार, इस वर्ष सोलन मंडी में औसत भाव तो बढ़े हैं (करीब 20-30% तक), लेकिन आवक के न्यूनतम स्तर पर आ जाने से कुल बिजनेस 100 करोड़ रुपये से भी नीचे आ गिरा है।
प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के किसान इस वर्ष के खराब सीजन से बुरी तरह आहत हैं। कई किसानों का कहना है कि पिछले साल (2025) की अपेक्षा इस बार उनकी आय 60% से ज्यादा घट गई है।
सोलन फल मंडी समिति के सचिव ने बताया कि घटती आवक को देखते हुए मंडी शुल्क में कुछ राहत देने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, राज्य सरकार से प्रभावित बागवानों के लिए विशेष राहत पैकेज और शीघ्र फसल बीमा दावों की मांग की गई है, ताकि किसानों को उनके नुकसान की भरपाई हो सके।

व्यापार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में कम ऊँचाई वाले बागों से और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से सीमित मात्रा में सेब सोलन मंडी पहुँच सकता है, लेकिन 2025 के स्तर को छूना अब असंभव सा लगता है। त्योहारी सीजन से पहले अगर आवक नहीं बढ़ी, तो आम उपभोक्ताओं को सेब के दाम आसमान पर देखने को मिल सकते हैं।
मार्केट कमेटी सोलन के अध्यक्ष रोशन ठाकुर का कहना है कि इस वर्ष परमाणु व सोलन मंडी में से ब का कारोबार काफी कम हुआ है कम उत्पादन का असर इस वर्ष कारोबार पर काफी अधिक देखा जा रहा है








