– सिर्फ कैरियर नहीं, अब वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों से खोजे जा रहे हैं सरगने; वर्ष 2026 में अब तक 63 किंगपिन गिरफ्तार
भूपेंद्र ठाकुर,
01 अगस्त / शिमला।
शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के विरुद्ध अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। अब प्रत्येक ND&PS मामले की जांच केवल बरामदगी और कैरियर की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक, तकनीकी एवं वित्तीय विवेचना के माध्यम से पूरे सप्लाई नेटवर्क के मुख्य संचालकों (Kingpins) तक पहुँचा जा रहा है। इसी नई रणनीति के तहत हाल ही में दो बड़े मामलों में बाहरी राज्यों के तीन प्रमुख सप्लायरों को सलाखों के पीछे धकेलने में सफलता मिली है।

पहला मामला: ₹10,500 के गूगल पे ट्रांजेक्शन ने खोला राज
यह मामला पुलिस थाना पश्चिमी शिमला का है। दिनांक 08.07.2026 को शोघी बैरियर पर स्पेशल सेल, शिमला द्वारा चेकिंग के दौरान 19 वर्षीय अनुज राजटा (निवासी कुमारसैन, शिमला) के कब्जे से 6 ग्राम ‘चिट्टा’ (हेरोइन) बरामद किया गया। इस पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर मौके से ही गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी। टीम ने बैकवर्ड लिंकेज स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया। आरोपी के मोबाइल फोन, Call Detail Records (CDR), Internet Protocol Detail Records (IPDR) और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई। वित्तीय विश्लेषण में पाया गया कि अनुज ने चिट्टा खरीदने के एवज में ₹10,500 की राशि Google Pay के माध्यम से ट्रांसफर की थी।
इसी लेन-देन की कड़ी पकड़ते हुए पुलिस की विशेष टीम ने पंजाब में दबिश दी। टीम ने साजन सिंह (निवासी कपूरथला, पंजाब) को कपूरथला से तथा जतिन कुमार (निवासी फिरोजपुर, पंजाब) को जालंधर से गिरफ्तार किया। जांच में साजन सिंह इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का मुख्य सरगना (Kingpin) निकला, जबकि जतिन कुमार चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई की सुविधा देता था।
दूसरा मामला: डिजिटल साक्ष्यों ने हरियाणा तक पहुँचाया
दूसरा मामला पुलिस थाना रामपुर से जुड़ा है। दिनांक 17.07.2026 को डिटेक्शन सेल, उपमण्डल रामपुर ने रोपड़ू नाला क्षेत्र में गश्त के दौरान एक संदिग्ध कार की तलाशी ली। कार में सवार अजेन्द्र कुमार (किन्नौर), मोनिका (कुल्लू) और निखिल (शिमला) के कब्जे से 9 ग्राम चिट्टा, एक डिजिटल वज़न मशीन और ₹26,000 नकद बरामद किए गए। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में भी पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच को प्राथमिकता दी। आरोपियों के मोबाइल और CDR के विश्लेषण के साथ-साथ Google Pay ट्रांजेक्शन की बारीकी से छानबीन की गई। जांच में खुलासा हुआ कि मोनिका और निखिल ने यह नशीला पदार्थ चंडीगढ़ के मनीमाजरा क्षेत्र में सक्रिय रवि उर्फ रवि गिल से खरीदा था, जो ऑटो चालक की आड़ में इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था।
विवेचना में यह भी पुष्टि हुई कि चिट्टे की खरीदारी की रकम रवि गिल की पत्नी के बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी। डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने हरियाणा के पिंजौर में दबिश देकर रवि गिल को गिरफ्तार कर लिया।

तीन वर्षों में सबसे बड़ी सफलता: 63 किंगपिन धराए
शिमला पुलिस की इस नई रणनीति के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में अब तक पुलिस ने 63 मुख्य सप्लायर (Kingpins) को गिरफ्तार किया है, जबकि 48 बड़े अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।
तुलना के लिए, वर्ष 2025 में यह आँकड़ा महज 7 किंगपिन और 4 नेटवर्क तक सीमित था। इससे पहले वर्ष 2024 में भी केवल 7 किंगपिन ही गिरफ्तार किए गए थे और मात्र 2 नेटवर्क ही ध्वस्त हो पाए थे।
इन दोनों हाई-प्रोफाइल मामलों से स्पष्ट है कि शिमला पुलिस अब पारंपरिक जांच से हटकर वित्तीय लेन-देन, डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी साक्ष्यों को सबूत बनाकर नशा माफियाओं की जड़ तक पहुँच रही है, जो नशे के खिलाफ इस जंग में एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।








