भावना ठाकुर,
10 जुलाई / कण्डाघाट, (सोलन)।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कदौर, शिक्षा खंड कंडाघाट, जिला सोलन में व्यावसायिक शिक्षा (एग्रीकल्चर ट्रेड) के अंतर्गत ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन की एक सराहनीय पहल की गई है। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे कौशल विकास के साथ-साथ पोषण एवं स्वरोजगार की संभावनाओं से भी परिचित हो रहे हैं।

विद्यालय के वोकेशनल ट्रेनर विवेक शर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अब तक लगभग 10 किलोग्राम ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम का सफल उत्पादन किया है। उत्पादित मशरूम का उपयोग विद्यालय के मिड-डे मील में किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को प्रोटीन एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर भोजन उपलब्ध हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि फ़रवरी 2026 में विवेक शर्मा ने उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा द्वारा भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित शिक्षक एक्सपोज़र कार्यक्रम के अंतर्गत मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चंबाघाट, सोलन में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी को अब विद्यालय के विद्यार्थियों तक पहुँचाया जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थी स्वयं मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया सीख रहे हैं तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यवहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
यह पहल विद्यार्थियों में कृषि के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती, पोषण सुरक्षा तथा कृषि आधारित उद्यमिता को भी प्रोत्साहित कर रही है। विद्यालय का यह प्रयास कौशल आधारित शिक्षा को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य भूपिंदर सिंह ने इस अवसर पर कहा,

“विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक कौशल से भी सशक्त बनाना है। ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, नवाचार तथा कृषि के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती हैं। हमें प्रसन्नता है कि विद्यालय में उत्पादित मशरूम का उपयोग विद्यार्थियों के मिड-डे मील में किया जा रहा है, जिससे उन्हें पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन प्राप्त हो रहा है। इस सफल पहल के लिए मैं उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग तथा भारती एयरटेल फाउंडेशन का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण के माध्यम से हमारे शिक्षक ने यह तकनीक सीखी और आज विद्यालय के विद्यार्थियों तक पहुँचा रहे हैं। भविष्य में भी विद्यालय ऐसे नवाचारों को निरंतर बढ़ावा देता रहेगा।”
विद्यालय परिवार का विश्वास है कि इस प्रकार की पहलें विद्यार्थियों को कौशल सम्पन्न, आत्मनिर्भर एवं रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेंगी।








