भूपेंद्र ठाकुर,
26 मई /शिमला।
हिमाचल प्रदेश में बढ़ते पारे और लू जैसी परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक, हाई स्कूलों तथा निजी शिक्षण संस्थानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रार्थना सभाओं, खेलकूद, पीटी तथा अन्य लंबे समय तक चलने वाली बाहरी गतिविधियों को न्यूनतम करने का निर्णय लिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें पुनर्निर्धारित या स्थगित भी किया जा सकता है।
निदेशालय ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि परिसर में हर समय स्वच्छ, सुरक्षित और ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विद्यार्थियों को प्रतिदिन पानी की बोतल साथ लाने और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाए।

अवकाश और खाली पीरियड के दौरान विद्यार्थियों को तेज धूप में खेलने या खुले में रहने से रोकते हुए छायादार एवं हवादार स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर छाता या अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपनाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
गर्मी से बीमारी पर विशेष ध्यान:
निर्देशों के अनुसार, यदि किसी छात्र में चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक पसीना आना, निर्जलीकरण, बेहोशी या कमजोरी जैसे हीट स्ट्रोक अथवा गर्मी से संबंधित बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित की जाए।
स्कूल प्रशासन को कक्षाओं और अन्य सामान्य क्षेत्रों में पंखों, कूलरों तथा अन्य शीतल व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, पर्याप्त जल सेवन और गर्मी से बचाव के प्रति जागरूक करने को कहा गया है।
विद्यार्थियों को ओआरएस, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों के सेवन का महत्व भी समझाया जाएगा। शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्कूल प्रशासन को देंगे। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।









