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पराशर घाटी के बम्बोला क्लस्टर में 13 हेक्टेयर में रोपित होंगे जापानी फल के 8500 पौधे

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Rashar Ghati Japanese fruit plantation
मंडी के बम्बोला क्लस्टर में पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने 13 हेक्टेयर में 8,500 जापानी फल (पर्सिमन) के पौधों का रोपण किया। एचपी शिवा परियोजना के तहत किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीक और आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

मंडी, 5 फरवरी।

द्रंग विधानसभा क्षेत्र के सदर विकास खंड की सम्पूर्ण पराशर घाटी में बागवानी विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश सब-ट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर इरिगेशन एंड वैल्यू एडिशन (एचपी शिवा) परियोजना के अंतर्गत जापानी फल (पर्सिमन) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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इस परियोजना के तहत क्षेत्र में कुल 70 हेक्टेयर भूमि में 6 क्लस्टरों—बम्बोला, बाँधी, बागी, बाड़ा, सुरन तथा मण्डाह में लगभग 40 हजार जापानी फल के पौधे रोपित किए जा रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से

इन 6 क्लस्टरों के लगभग 200 बागवान लाभान्वित होंगे। इसके साथ-साथ किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है।

आज ग्राम पंचायत सेगली के बम्बोला क्लस्टर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने 13 हेक्टेयर क्षेत्र में 8,500 जापानी फल के पौधों के रोपण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि

एचपी शिवा परियोजना किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जापानी फल की खेती से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्र में बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. वी.पी. बैंस ने किसानों को जापानी फल की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि यह फल स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है तथा बाजार में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य में यह बागवानों के लिए आय का एक सशक्त एवं टिकाऊ माध्यम बनेगा।

उप-निदेशक बागवानी डॉ. संजय गुप्ता ने एचपी शिवा परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह योजना क्लस्टर आधारित खेती, आधुनिक सिंचाई सुविधाओं एवं मूल्य संवर्द्धन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की अपार क्षमता रखती है। उन्होंने किसानों से परियोजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

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इस अवसर पर बागवानी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान तथा बड़ी संख्या में स्थानीय बागवान उपस्थित रहे। किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर जापानी फल की खेती से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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