Home हिमाचल प्रदेश DAV सोलन में ‘फीट टचिंग सेरेमनी’ से जगा मातृत्व सम्मान का भाव

DAV सोलन में ‘फीट टचिंग सेरेमनी’ से जगा मातृत्व सम्मान का भाव

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दयानंद आदर्श विद्यालय (DAV) के प्रांगण में आज एक हृदयस्पर्शी एवं संस्कारपरक कार्यक्रम 'फीट टचिंग सेरेमनी' (चरण स्पर्श समारोह) का आयोजन किया गया।

हिमाचल समय, सोलन 14 जून।

दयानंद आदर्श विद्यालय (DAV) के प्रांगण में आज एक हृदयस्पर्शी एवं संस्कारपरक कार्यक्रम ‘फीट टचिंग सेरेमनी’ (चरण स्पर्श समारोह) का आयोजन किया गया।

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इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिकता की दौड़ में कहीं गुम हो रहे भारतीय संस्कृति व संस्कारों की अलख को नन्हें छात्र-छात्राओं के मन में जगाना था।

विद्यालय की प्रिंसिपल ऊषा मित्तल ने बताया कि यह आयोजन DAV की सदियों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।

उन्होंने कहा, “आज के युग में जहां संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं, ऐसे में बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ना जरूरी है। चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना हमारी संस्कृति की मजबूत नींव है।

“कार्यक्रम का संचालन शिक्षिकाएं सुमिति चंदेल व परुल राना (एक्टिविटी इंचार्ज) ने कक्षा चौथी के छात्रों के लिए किया।माताओं को विशेष आमंत्रण: छात्रों की माताओं को इस भावपूर्ण कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया,

जिन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।चरण धोकर माँगा आशीर्वाद: छात्रों ने अपनी माताओं के चरण धोए, उन्हें फूल अर्पित किए और आदरपूर्वक उनका आशीर्वाद लिया।

भावेश (माँ किरण गुप्ता), भविषा (माँ मंदाकिनी ठाकुर), मिष्टी (माँ नीता ठाकुर), नविता (माँ हेमलता), अंकुला (माँ पूजा) और आद्विक (माँ दीपिका) सहित सभी बच्चों ने इस रिवाज को पूरी श्रद्धा से निभाया।

प्रिंसिपल को सम्मान: हेड बॉय शौर्य और हेड गर्ल दीक्षिता ने सर्वप्रथम प्रधानाचार्या ऊषा मित्तल के चरण धोकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

शुभारंभ प्रिंसिपल द्वारा दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ। इसके बाद छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी।

समापन पर प्रिंसिपल ने सभी माताओं को ‘टोकन ऑफ लव’ भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

कार्यक्रम में शामिल सभी माताएँ अत्यंत प्रसन्न और भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह देखकर गर्व होता है कि उनके बच्चे ऐसे विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं

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जहाँ आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों पर भी उतना ही बल दिया जाता है। एक माँ ने कहा, “यह पल हमेशा याद रहेगा। बच्चों में संस्कारों का बीज बोने के लिए विद्यालय प्रबंधन को धन्यवाद।”

यह आयोजन न केवल बच्चों को उनकी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का प्रयास था, बल्कि मातृ-शक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव को पुनर्जीवित करने की एक सार्थक पहल भी साबित हुआ।

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