
हिमाचल समय, सोलन, 26 जनवरी ।
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 77वां गणतंत्र दिवस बड़े ही धूमधाम और देशभक्ति के उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने से हुई। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के सचिव एवं सचिव (शिक्षा) राकेश कंवर इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता रहे।
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इस अवसर पर प्रो. चंदेल द्वारा परेड का निरीक्षण किया गया, जिसके उपरांत विश्वविद्यालय के 125 एनसीसी कैडेट्स, 56 एनएसएस स्वयंसेवकों, 22 स्काउट्स तथा 22 सुरक्षाकर्मियों ने आकर्षक मार्च पास्ट प्रस्तुत किया।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. चंदेल ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों के निस्वार्थ बलिदान एवं स्वतंत्रता संग्राम को स्मरण करते हुए भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने विद्यार्थियों और कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठ एवं जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के मूल्यों को आगे बढ़ाने की अपील की।
मुख्य अतिथि राकेश कंवर ने अपने संबोधन में भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने विभिन्न शोधों के उदाहरण देते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग डिजिटल रूप से तो अत्यधिक जुड़ा हुआ है,
लेकिन व्यक्तिगत संपर्क में कमी देखने को मिल रही है। उन्होंने युवाओं से जीवन को उत्सव की तरह जीने, अपनी विशिष्टताओं को पहचानने और निरंतर कौशल विकास पर ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा या लक्ष्य में असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय जीवन का आनंद लेते हुए स्वयं को बेहतर बनाना चाहिए। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता
और क्षणिक सुख के लिए अपने भविष्य से समझौता नहीं करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने अत्यधिक मोबाइल स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक संबंधों और पारिवारिक मेल-मिलाप को मजबूत करने का आह्वान किया।
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इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा देशभक्ति एवं भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। साथ ही, विश्वविद्यालय परिसर में एक स्वच्छता अभियान का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्रों एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, छात्र तथा स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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