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नर्सरी प्रत्यायन हेतु राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की टीम ने नौणी के फल विज्ञान विभाग की नर्सरी का किया दौरा

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डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी 10 से 16 फरवरी 2026 तक सेब में अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों को लेकर राज्य-स्तरीय जागरूकता अभियान चलाएगा। इस अभियान के तहत शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा और मंडी जिलों में आठ विशेषज्ञ टीमें तैनात की जाएंगी।

हिमाचल समय, सोलन, 14 दिसम्बर ।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की एक टीम ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के फल विज्ञान विभाग की नर्सरी का दौरा किया। इस दौरान विश्वविद्यालय की नर्सरी के निरीक्षण एवं प्रत्यायन की प्रक्रिया संपन्न की गई।

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एम. डी. इलेवन की टीम ने चेयरमैन इलेवन को पराजित किया

दौरा करने वाली टीम की अध्यक्षता डॉ. वाई. सी. गुप्ता, कंसल्टेंट-कम-चेयरमैन ने की। टीम में डॉ. एस. के. चौरसिया, उप निदेशक, एनएचबी शिमला; डॉ. अनुराग शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र, सोलन; डॉ. अंजली कटोच, कृषि विकास अधिकारी सहित एनएचबी के अन्य प्रतिनिधि शामिल थे।

डॉ. देविना वैद्य, निदेशक अनुसंधान; डॉ. जितेंद्र चौहान, विभागाध्यक्ष, फल विज्ञान विभाग; डॉ. विशाल राणा, संयुक्त निदेशक अनुसंधान; डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. गोपाल सिंह एवं डॉ. प्रमोद वर्मा ने टीम को विभिन्न नर्सरी इकाइयों, जीन बैंक तथा प्रमुख समशीतोष्ण फल फसलों के मदर ब्लॉक्स का भ्रमण करवाया।  इनमें सेब, कीवी, प्लम, आड़ू, नेक्टेरिन, अखरोट, पर्सिमन तथा चेरी शामिल हैं।

फल विज्ञान विभाग क्षेत्र में समशीतोष्ण फल फसलों की अग्रणी नर्सरियों में से एक है, जो कुल 6.7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। इसमें से 4.5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नर्सरी पौध तैयार किए जाते हैं, जबकि लगभग 2.2 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फल प्रजातियों के जीन बैंक एवं मदर ब्लॉक्स स्थापित हैं। दौरे के दौरान एनएचबी टीम ने विभाग की चल रही अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा की तथा नर्सरी पौध उत्पादन में अपनाई जा रही आधुनिक विधियों एवं तकनीकों का आकलन किया। टीम को किसानों के खेतों में शामिल किए जाने हेतु नई फल फसलों पर किए जा रहे अनुसंधान एवं फील्ड ट्रायल्स की भी जानकारी दी गई।

पिछले तीन दशकों में विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश एवं पड़ोसी राज्यों के किसानों को लाखों की संख्या में गुणवत्तापूर्ण फल पौध उपलब्ध करवाई गई हैं। वर्तमान में विभाग में सेब की 68 से अधिक किस्में, प्लम की 10 किस्में, खुबानी की 12 किस्में, आड़ू एवं नेक्टेरिन की 15 किस्में, अखरोट की 10 किस्में, कीवी की 5 किस्में, चेरी की 6 किस्में तथा पर्सिमन की 2 किस्में संरक्षित एवं इसके  पौधे तैयार किए जा रहे है।

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