
हिमाचल समय, सोलन, 14 नवंबर ।
गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, सोलन में 14 नवंबर 2025 को अत्यंत भव्यता, गरिमा और सांस्कृतिक आभा के साथ आयोजित “प्रवृद्धि : संस्कृति से समृद्धि तक” वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव 2025 एक ऐसा अद्वितीय समारोह सिद्ध हुआ जिसने विद्यालय की गौरवशाली परंपरा, भारतीय संस्कारों, आधुनिक चिंतन और विद्यार्थियों की
बहुआयामी प्रतिभा को सजीव रूप से अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुकुल की सनातन परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि , विशिष्ट अतिथि ,विद्यालय के प्रबंधन समिति के आदरणीय सदस्य ,प्रधानाचार्या डॉ. लखविंदर कौर अरोड़ा, तथा सभी विशिष्ट अतिथि सम्मिलित हुए। इस वर्ष के मुख्य अतिथि
त्रिलोक जम्वाल (विधायक, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश) तथा विशिष्ट अतिथि राहुल जैन (भारतीय प्रशासनिक सेवा, अतिरिक्त उपायुक्त सह परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सोलन), शूलिनी विश्वविद्यालय की ट्रस्टी एवं उपाध्यक्ष एन्वी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण
बनाया। “प्रवृद्धि : संस्कृति से समृद्धि तक” जैसी दूरदर्शी और चिंतनशील थीम इस बात की ओर संकेत करती है कि समाज और राष्ट्र की वास्तविक उन्नति केवल वैज्ञानिक प्रगति, आर्थिक विकास या तकनीकी विस्तार से नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर, नैतिक मूल्य, कर्तव्यभाव, आंतरिक अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण से
होती है। इस संपूर्ण विषय को विद्यार्थियों ने अत्यंत गंभीरता, परिपक्वता और कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ मंच पर प्रस्तुत किया—कहीं भारतीय सांस्कृतिक जड़ों की शक्ति का संदेश दिया गया, कहीं “विकसित भारत” की कल्पना को आधुनिक दृष्टिकोण से उकेरा गया, तो कहीं सामाजिक चेतना, पर्यावरण-चिंतन, नारी-सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता,
विज्ञान-समन्वय और मानवीय संवेदनाओं के महत्व को भावपूर्ण शैली में अभिव्यक्त किया गया। बच्चों की प्रस्तुतियों का मूल सार यही रहा कि संस्कृति वह आधार है जिस पर समृद्धि की संपूर्ण संरचना खड़ी होती है, और जब समाज अपनी पहचान, परंपरा तथा मूल्य-व्यवस्था के साथ आगे बढ़ता है तभी “प्रवृद्धि” का वास्तविक रूप प्रकट होता है।
कार्यक्रम की भव्यता का हृदयस्पर्शी स्वरूप इस तथ्य में निहित था कि इसमें किसी भी प्रस्तुति को महज़ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक संदेश, एक मूल्य और एक दिशा के रूप में रूपायित किया गया था। सभी अतिथियों और अभिभावकों के लिए प्रीतिभोज का आयोजन किया गया । विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. लखविंदर कौर अरोड़ा ने अपने
आशीर्वचन में कहा कि गुरुकुल की शिक्षा-दृष्टि सदैव “संस्कृति और आधुनिकता के संतुलित समन्वय” पर आधारित रही है, और यही कारण है कि हमारे विद्यार्थी केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि संस्कारित, संवेदनशील, अनुशासित और राष्ट्रभक्त भी हैं। उन्होंने इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग की सराहना
की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम व्यक्तित्व विकास का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। मुख्य अतिथि त्रिलोक जम्वाल ने अपने प्रेरक संदेश में कहा कि “विकसित भारत” का निर्माण उन युवा हाथों से होगा जो संस्कृति को अपनी शक्ति, शिक्षा को अपनी दिशा और मूल्य-व्यवस्था को अपना चरित्र बनाते हैं। विशिष्ट अतिथि
राहुल जैन ने विद्यालय के उत्कृष्ट आयोजन, बच्चों की गहन अभिव्यक्ति और शिक्षकों के मार्गदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों की प्रस्तुतियाँ भारतीय भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। प्रबंधन समिति के सभी सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विद्यालय परिवार को शुभकामनाएँ दीं और सभी सम्मानित अतिथियों का
हार्दिक आभार व्यक्त किया। विद्यालय गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जहाँ पूरे प्रांगण में भारतीयता, एकता, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव का अद्वितीय वातावरण प्रतिध्वनित हो उठा। इस प्रकार “प्रवृद्धि : संस्कृति से समृद्धि तक” का यह संदेश जन-मन में दृढ़ता से स्थापित करता है कि शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं,
शूलिनी विश्वविद्यालय में मार्केटिंग और संचार में करियर निर्माण पर सत्र आयोजित
बल्कि संस्कृति, संवेदना, चरित्र और समग्र जीवन-मूल्यों का विस्तार है—और गुरुकुल इंटरनेशनल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सोलन, इसी पवित्र ध्येय के साथ भविष्य की पीढ़ियों को संस्कारित, सक्षम और प्रगतिशील बनाने हेतु निरंतर अग्रसर है।
ताज़ा खबरों के लिए जोड़े www.himachalsamay.com








