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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत व पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए

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himachal pradesh disaster relief

मंडी, 24 सितम्बर।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए आज उपायुक्त कार्यालय मंडी में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अपूर्व देवगन ने की। 

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बैठक में सभी खंड विकास अधिकारियों ने अपने-अपने विकास खंडों में चल रही योजनाओं और हाल ही में आई आपदा के बाद बहाल किए गए कार्यों की स्थिति प्रस्तुत की।

उपायुक्त ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र सुविधा मिल सके इसके लिए राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि विकास एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अवसंरचना की बहाली और मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

उपायुक्त ने बताया कि जिले में मनरेगा के अंतर्गत 566.46 करोड़ रुपये की लागत से 34,327 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से अब तक 1,512 कार्य शुरू हुए हैं जिन पर 6.63 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

उन्होंने स्वीकृत कार्यों को शीघ्र आरंभ करने और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। वर्तमान में जिले में 38,249 कार्य लंबित हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले केवल 75 प्रतिशत ही मानव दिवस अर्जित हुए हैं, इसमें शीघ्र सुधार लाना होगा।

उन्होंने जानकारी दी कि अमृत सरोवर के चरण दो में जिले में 49 स्थानों पर अमृत सरोवर बनाए जाएंगे और स्थानों का चयन कर लिया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने प्रगति पर असंतोष जताया और बीडीओ को निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए।

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उन्होंने कहा कि जो स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं उनकी सफलता की कहानियां प्रकाशित की जाएं तथा उनके तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूहों को दिवाली के दौरान विशेष फोकस के साथ बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा।

उपायुक्त ने कहा कि एनआरएलएम के अंतर्गत ग्राम संगठनों को बुड कटर, पावर टिलर आदि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें किसानों को किराए पर दिया जाना है। लेकिन किसानों को इसकी जानकारी नहीं है, इसलिए इस बारे में लोगों को जागरूक किया जाए।

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