भावना ठाकुर,
23 अक्टूबर / सोलन।
आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन संबंधित सीटू, हिमाचल प्रदेश के आह्वान पर आज सोलन जिला के सोलन, परवाणू, नालागढ़ और अर्की में आंगनवाड़ी वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए। इस दौरान संबंधित अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को मांग पत्र भेजकर आंगनवाड़ी वर्करों एवं हेल्परों की लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई गई।

प्रदर्शनों में आंगनवाड़ी वर्करों एवं हेल्परों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और प्रदेश सरकार से मांग की कि उनके मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ तथा कार्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
सीटू जिला महासचिव मोहित वर्मा ने कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। वे छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं के कल्याण के लिए दिन-रात काम करती हैं। इसके अलावा सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पिछले दस वर्षों के कार्यकाल में आंगनवाड़ी वर्करों के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन आंगनवाड़ी वर्करों को मिलने वाला मानदेय उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। सरकार उनसे लगातार अधिक काम ले रही है, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
मोहित वर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी हैं। चार श्रम संहिताओं के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीटू इन श्रम संहिताओं का विरोध करती है और पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग करती है।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर लंबे समय से सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठा रही हैं। सरकार को आंगनवाड़ी कर्मियों के काम को मान्यता देते हुए उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित करना चाहिए तथा न्यूनतम वेतन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए।
मोहित वर्मा ने घोषणा की कि 1 और 2 दिसंबर को सीटू के आह्वान पर दिल्ली में होने वाले मजदूरों के घेराव में हिमाचल प्रदेश से सैकड़ों आंगनवाड़ी वर्कर हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा कि देशभर के मजदूरों के साथ आंगनवाड़ी वर्कर भी दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगी। यह आंदोलन मजदूरों के अधिकारों की रक्षा, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी वर्करों का संघर्ष केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान, अधिकारों और सुरक्षित भविष्य की लड़ाई है। बच्चों के पोषण और महिला एवं बाल कल्याण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं देने वाली कर्मियों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई गईं प्रमुख मांगें
यूनियन ने मुख्यमंत्री को भेजे मांग पत्र में निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाईं—
- बजट सत्र में घोषित मानदेय में ₹1,000 की वृद्धि एरियर सहित प्रदान की जाए।
- सेवानिवृत्ति के बाद पात्र कर्मियों को ग्रेच्युटी का भुगतान तुरंत किया जाए।
- आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों का दाखिला सुनिश्चित किया जाए और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
- आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए पारदर्शी तबादला नीति बनाई जाए तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादले के अधिक अवसर दिए जाएं।
- पोषण ट्रैकर पर काम करने के लिए आवश्यक स्मार्टफोन उपलब्ध करवाए जाएं और रिचार्ज के लिए ₹4,000 की राशि दी जाए।
- आंगनवाड़ी कर्मियों और उनके पात्र परिवारों को आयुष्मान भारत अथवा संबंधित स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में शामिल किया जाए।
- आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
- पंजाब की तर्ज पर एक माह का चिकित्सा अवकाश मानदेय सहित प्रदान किया जाए।
यूनियन ने प्रदेश सरकार से मांग की कि इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करके संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकारों की ओर से उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि 1 और 2 दिसंबर को दिल्ली में होने वाला घेराव मजदूरों की एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन होगा। इसमें हिमाचल प्रदेश से आंगनवाड़ी वर्कर बड़ी संख्या में भाग लेकर मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करेंगी।






