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राज्यपाल ने बौद्धिक विमर्श, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का किया आह्वान

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हिमाचल समय न्यूज़,

18 अक्टूबर / जम्मू।

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राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने गत सायं जम्मू के अभिनव थिएटर में बाबा बंदा सिंह बहादुर मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित द्वितीय सिख बौद्धिक सम्मेलन-2026 में संबोधित करते हुए सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। उन्होंने बुद्धिजीवियों एवं समुदाय के नेताओं से मानवता, समानता, सेवा और भाईचारे के शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। इस अवसर पर उन्होंने समाज के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों को सम्मानित भी किया।


राज्यपाल ने बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की गौरवशाली विरासत का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन वीरता, त्याग, न्याय और मानवता की रक्षा का अनुपम उदाहरण है। गुरु गोबिंद सिंह जी से प्रेरणा प्राप्त कर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और वंचित एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन आज भी समाज को समानता, न्याय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
राज्यपाल ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से गुरु नानक देव जी के समानता एवं सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा धर्म और सत्य की रक्षा के लिए प्रदर्शित अदम्य साहस तथा चार साहिबजादों के सर्वाेच्च बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिख धर्म का सिद्धांत ‘सरबत दा भला’ अर्थात सर्वजन कल्याण, करुणा, सेवा और सामूहिक सुख-समृद्धि का सार्वभौमिक संदेश देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा सिख विरासत के संरक्षण एवं सम्मान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने करतारपुर साहिब गलियारे को खोलने, 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने तथा सिख समुदाय की आस्था, परंपराओं और योगदान के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने वाली अन्य पहलों का उल्लेख भी किया।
राज्यपाल ने सामाजिक एकजुटता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की समृद्ध साझा विरासत विभिन्न धर्मों, भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से मिलकर बनी है। उन्होंने कहा कि विविधता हमारी ताकत है और इस विरासत को संरक्षित रखने के लिए आपसी सम्मान, संवाद तथा शांति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।
श्री गुप्ता ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज के सभी वर्गों से मानवता, समानता, निःस्वार्थ सेवा और आपसी समझ को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने, महिलाओं को सशक्त बनाने तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने में शिक्षा, जिम्मेदार नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इससे पूर्व, अपने संबोधन में महंत मंजीत सिंह जी ने द्वितीय सिख बौद्धिक सम्मेलन के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मंच सिख दर्शन के प्रचार-प्रसार, समुदाय की समृद्ध विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर डेरा नंगाली साहिब, पुंछ के महंत मंजीत सिंह जी, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल, बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के गद्दीनशीन जतिंदर पाल सिंह सोढ़ी तथा मुख्य वक्ता डॉ. हरभजन सिंह सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

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