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कफोटा में राजस्व विभाग पर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के आरोप, दो दर्जन लोगों ने एसडीएम को दी शिकायत

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अनूप ठाकुर,

08 अक्टूबर / सिरमौर।

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शिलाई विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र बिंदु कफोटा में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला अब राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत में रिटायर्ड तहसीलदार तथा क्षेत्रीय कानूनगो की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि वर्ष 2024 से पहले मौके पर हुई निशानदेही को दरकिनार कर बाद के रिकॉर्ड में ऐसी स्थिति तैयार की गई, जिससे कथित अतिक्रमणकारियों को लाभ मिल सकता है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उच्च न्यायालय कैस नंबर 11071 से वर्ष 2024 से पहले की गई निशानदेही के दौरान मौके की स्थिति और रास्ते/सरकारी भूमि की स्थिति स्पष्ट की गई थी। आरोप है कि उस निशानदेही को आधार बनाने के बजाय बाद में रिकॉर्ड में बदलाव अथवा अलग स्थिति दर्शाने का प्रयास किया गया। यही विवाद अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

जानकारी अनुसार कफोटा बाजार में हुए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की निशानदेही को लेकर दो दर्जन लोगों ने राजस्व विभाग पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में दलीप सिंह, जगदीश, धनी राम, सोहन, गुलाब सिंह, सुरेश पुण्डीर, रति राम, कमलेश, मुंशी राम सहित दो दर्जन लोगों ने एसडीएम कफोटा को शिकायत दी है। शिकायत में बताया कि मामला उच्च न्यायालय के क्रमांक 11071 वर्ष 2024 से पहले की निशानदेही को आधार बनाया जाए, जिसमें तहसीलदार निशा आजाद ने केस पर निर्णय देकर प्रतिवादी पर जुर्माना भी किया था। परंतु दोबारा से क्षेत्रीय कानूनगो और रिटायर्ड तहसीलदार द्वारा राजस्व रिपोर्ट में छेड़छाड़ की जा रही है, जिसे गुलाब सिंह की जगह प्रदीप किया गया है और पहले की निशानदेही खसरा संख्या 627 मौके पर रास्ता मलकियत में है, जबकि प्रतिवादी का मकान पूरे रास्ते व हिमाचल सरकार की जमीन में आता है। अब क्षेत्रीय कानूनगो ने राजनीतिक दबाव से निशानदेही रिपोर्ट बिल्कुल भिन्न तथा गलत दिशा में दर्शा दी है, जिससे रास्ते को लेकर तनाव बना हुआ है और तनाव के कारण अब जान-माल का भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यदि इस निशानदेही से कोई जानी नुकसान हुआ तो उसके जिम्मेदार राजस्व विभाग होगा। उन्होंने बताया है कि हाल ही में हुई निशानदेही की रिपोर्ट को तत्काल रूप से खारिज किया जाए व 2024 से पहले हुई निशानदेही को बहाल कर सरकारी भूमि में बनी दुकानों को अपने अधीन लेकर आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाए।

शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि रास्ते को लेकर बढ़ता विवाद तनाव और जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है। उन्होंने एसडीएम से हाल की निशानदेही रिपोर्ट की जांच कर उसे निरस्त करने, वर्ष 2024 से पहले हुई निशानदेही को आधार बनाकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध कब्जे पर बनी दुकानों को कब्जे में लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उधर, कफोटा एसडीएम का कार्यभार देख रहे एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह ने बताया कि कफोटा में अवैध कब्जे में हुई निशानदेही को लेकर शिकायत उन्हें मिली है। जल्द ही आरोपियों पर सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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