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वन्य प्राणियों के शिकार पर कड़ी निगरानी, वन मंडल नाचन ने फील्ड स्टाफ को सतर्क रहने के दिए निर्देश; शिकार करते पकड़े जाने पर सात साल तक की कैद

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हिमाचल समय न्यूज़,

07 अक्टूबर / मंडी।

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सर्दियों के मौसम में वन्य प्राणियों के निचले क्षेत्रों में अप्रवासन के दृष्टिगत वन मंडल नाचन ने सभी वन परिक्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और फील्ड स्टाफ को वन्य जीवों के शिकार इत्यादि गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
वन मंडलाधिकारी नाचन मुनीश रांगड़ा ने बताया कि सर्दियों की दस्तक के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ने लगी है। इसके चलते भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वन्य प्राणी और पक्षी अब धीरे-धीरे निचले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं। घोरड, काकड़ और जंगली सुअर के अलावा मोनाल, कोकलास, कलीज, चीड़ तथा जुजुराना जैसे फेजेंट प्रजाति के पक्षी भी इन दिनों गांवों के आसपास के जंगलों और खेतों तक पहुंच सकते हैं।


उन्होंने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 के तहत संरक्षित वन्य प्राणियों और पक्षियों का शिकार प्रतिबंधित है। शिकार का अर्थ केवल किसी वन्य प्राणी को मारना ही नहीं है। अपितु, फंदा या जाल लगाकर पकड़ना, घायल करना, जहर देना, पीछा करना, पक्षियों के अंडे उठाना अथवा उनके घोंसले नष्ट करना भी शिकार की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा 39 के तहत वन्य प्राणी तथा उसका मांस, खाल, सींग या अन्य अंगों को अवैध रूप से कब्जे में रखना, खरीद-फरोख्त करना अथवा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अपराध है। सामान्य उल्लंघन पर तीन वर्ष तक की कैद या एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। अनुसूची-एक में शामिल वन्य प्राणियों के शिकार अथवा अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान में शिकार के मामलों में कम से कम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की कैद तथा न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर सजा और अधिक कठोर हो सकती है और शिकार में प्रयुक्त हथियार, वाहन व अन्य सामान जब्त किए जा सकते हैं।
मुनीश रांगड़ा ने बताया कि वनों और वन्य जीवों की रक्षा करना विभाग का दायित्व है, जबकि प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह वनों, नदियों और वन्य जीवों की रक्षा करें। उन्होंने क्षेत्र की जनता, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला मंडलों, युवक मंडलों तथा वन सुरक्षा समितियों से अपील की कि यदि कहीं शिकार या अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत नजदीकी वन रक्षक या अन्य अधिकारियों अथवा वन मंडलाधिकारी कार्यालय नाचन को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने लोगों से यह भी आग्रह किया कि यदि कोई वन्य प्राणी घायल अवस्था में मिले अथवा रिहायशी क्षेत्र या खेतों में पहुंच जाए तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विभागीय टीम आवश्यक उपचार एवं सुरक्षित बचाव कर उसे उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ने की कार्रवाई करेगी।

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