– ₹50 करोड़ अतिरिक्त राजस्व के लालच में सामाजिक नुकसान को नजरअंदाज न करे सुक्खू सरकार, लॉटरी शुरू करने का फैसला तत्काल वापस ले : जमवाल
भूपेंद्र ठाकुर,
13 सितंबर / शिमला।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू करने की कांग्रेस सरकार की योजना पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उनकी सरकार को समझ जाना चाहिए कि हिमाचल का समाज क्या चाहता है। जिस लॉटरी व्यवस्था को प्रदेश में लगभग 27 वर्ष बाद दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है, उसके शुरुआती टेंडर में ही राष्ट्रीय स्तर की लॉटरी कंपनियों की अपेक्षित रुचि न दिखना सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी है।

जमवाल ने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार पर्याप्त प्रतिस्पर्धा न मिलने के कारण लॉटरी टेंडर जमा करवाने की अंतिम तारीख 14 सितंबर से बढ़ाकर 28 सितंबर करनी पड़ी है। सरकार शुरुआत में लॉटरी से सालाना लगभग ₹50 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जबकि अधिकतम आय का अनुमान करीब ₹100 करोड़ तक लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सवाल केवल ₹50 करोड़ या ₹100 करोड़ जुटाने का नहीं है, बल्कि यह है कि उस राजस्व की सामाजिक कीमत कौन चुकाएगा?
उन्होंने कहा, “अब तो समझ जाओ कि समाज क्या चाहता है। जिस हिमाचल ने वर्षों पहले लॉटरी के दुष्परिणामों को देखते हुए इससे दूरी बनाई थी, उसी प्रदेश को फिर लॉटरी की ओर धकेलना कौन-सा विकास मॉडल है? सरकार खजाना भरने के लिए ऐसा रास्ता न चुने जिसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ सकता है।”
कंपनियों की कम रुचि सरकार की योजना पर बड़ा सवाल : जमवाल
राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार ने लॉटरी व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े राजस्व अनुमान लगाए, नियम अधिसूचित किए और राष्ट्रीय स्तर पर ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन शुरुआत में अपेक्षित संख्या में कंपनियां सामने नहीं आईं। अब टेंडर की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी है।
उन्होंने कहा कि समाचार रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों के सामने ₹50 करोड़ न्यूनतम नेटवर्थ, ₹30 करोड़ बैंक गारंटी/एफडी सिक्योरिटी, ₹10 करोड़ सालाना लाइसेंस फीस, राजस्व हिस्सेदारी की शर्त और देरी पर दंडात्मक ब्याज जैसी वित्तीय शर्तें रखी गई हैं। यदि इन शर्तों के कारण पर्याप्त कंपनियां आगे नहीं आ रही हैं तो सरकार को केवल तारीख बढ़ाने के बजाय पूरी योजना की व्यवहारिकता और सामाजिक आवश्यकता पर पुनर्विचार करना चाहिए।
जमवाल ने कहा, “जब शुरुआत में ही सरकार को टेंडर की तारीख बढ़ानी पड़ रही है तो यह आत्ममंथन का समय है। हर सरकारी योजना का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं हो सकता। सरकार की पहली जिम्मेदारी समाज और परिवारों के हितों की रक्षा करना है।”
₹50 करोड़ के लिए हिमाचल के परिवारों का भविष्य दांव पर क्यों?
भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि लॉटरी को केवल आय के साधन के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद व्यक्ति को बार-बार टिकट खरीदने के लिए प्रेरित कर सकती है और इसका आर्थिक बोझ विशेष रूप से सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बताए कि क्या उसने लॉटरी दोबारा शुरू करने से पहले इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का कोई विस्तृत अध्ययन करवाया है? सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि उसने संभावित राजस्व के साथ-साथ परिवारों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभाव का क्या आकलन किया है।
जमवाल ने कहा, “सरकार ₹50 करोड़ अतिरिक्त कमाने की बात कर रही है, लेकिन यह पैसा अंततः आएगा कहां से? टिकट खरीदने वाली जनता की जेब से ही आएगा। सरकार को राजस्व बढ़ाना है तो रोजगार, उद्योग, पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाए; जनता को लॉटरी के सपने बेचकर खजाना भरना समाधान नहीं है।”
हिमाचल को रोजगार और निवेश चाहिए, लॉटरी का सहारा नहीं
राकेश जमवाल ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार चाहिए, व्यापारियों को बेहतर कारोबारी वातावरण चाहिए, किसानों-बागवानों को बाजार और सुविधाएं चाहिए तथा प्रदेश को नए उद्योग एवं निवेश की आवश्यकता है। कांग्रेस सरकार को अपनी ऊर्जा इन क्षेत्रों में लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक संकट का हवाला देकर लगातार ऐसे फैसले नहीं ले सकती जिनका बोझ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी पर पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी टैक्स और शुल्क बढ़ाने तथा कभी नए राजस्व साधन तलाशने के बजाय सरकार को अपने खर्चों और आर्थिक प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए।
तारीख नहीं, फैसला बदलने की जरूरत : जमवाल
राकेश जमवाल ने कहा कि टेंडर जमा करने की तारीख 14 सितंबर से बढ़ाकर 28 सितंबर करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को तारीख बदलने के बजाय अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी, तारीख बढ़ाने से संदेश नहीं बदलेगा। हिमाचल की सामाजिक संरचना और परिवारों के हित किसी भी संभावित राजस्व से अधिक महत्वपूर्ण हैं। अभी भी समय है—सरकार जिद छोड़े, समाज की भावना समझे और लॉटरी शुरू करने का फैसला वापस ले।”
जमवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के आर्थिक संसाधन बढ़ाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन संसाधन जुटाने का मॉडल ऐसा होना चाहिए जो रोजगार पैदा करे, उत्पादन बढ़ाए, निवेश लाए और हिमाचल के परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को स्पष्ट रूप से तय करना होगा कि उसकी प्राथमिकता जनकल्याण है या किसी भी कीमत पर राजस्व जुटाना। हिमाचल की जनता को लॉटरी नहीं, अवसर चाहिए; युवाओं को टिकट नहीं, रोजगार चाहिए और प्रदेश को जुए जैसी प्रवृत्तियों पर आधारित आय नहीं बल्कि मजबूत एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था चाहिए।








