– राज्य अभिलेखागार के 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा, जल्द बनेगा ऑनलाइन पोर्टल
भूपेंद्र ठाकुर,
08 सितंबर / शिमला।
हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत अब डिजिटल रूप में संरक्षित होगी। हिमाचल राज्य अभिलेखागार में संरक्षित दुर्लभ दस्तावेजों के लगभग 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण प्रथम चरण में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह पहल प्रदेश की अमूल्य दस्तावेजी धरोहर के दीर्घकालिक संरक्षण और उसे आमजन व शोधकर्ताओं तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य अभिलेखागार में वर्ष 1807 से अब तक के 30 हजार से अधिक ऐतिहासिक अभिलेख, दुर्लभ पुस्तकें, गजेटियर, सेटलमेंट रिपोर्ट्स, पांडुलिपियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित हैं। इनका उपयोग हिमाचल ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के शोधकर्ता, इतिहासकार और शिक्षाविद लगातार अध्ययन एवं शोध कार्य के लिए करते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत नेशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे का कार्य भी जारी है। इसके तहत प्रदेश में उपलब्ध दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है। सर्वेक्षण में चिन्हित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य नेशनल डिजिटाइजेशन ड्राइव के तहत हिमाचल राज्य संग्रहालय, शिमला में स्थापित क्लस्टर सेंटर के माध्यम से किया जा रहा है।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल अभिलेखों को शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए सहज उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एक अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल विकसित किया जाएगा। विभाग द्वारा तैयार किया गया पूरी तरह सर्चेबल डिजिटल डेटा पोर्टल की होस्टिंग, प्रबंधन, रख-रखाव और भविष्य के उन्नयन के लिए आईटी विभाग को उपलब्ध करवाया जाएगा। यह पोर्टल जल्द ही स्कॉलर्स, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आम जनता को समर्पित किया जाएगा। इससे हिमाचल की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर तक सुरक्षित, सरल और व्यापक ऑनलाइन पहुंच संभव होगी। साथ ही शोध, अध्ययन, दस्तावेजीकरण और ज्ञान के प्रसार को नई गति मिलेगी।
श्री अग्निहोत्री ने कहा कि नेशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे के दौरान चिन्हित दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की डिजिटल प्रतियां भी हिमाचल राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित रखी जाएंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों को उनके विषय से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियां अध्ययन और संदर्भ के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हिमाचल के गौरवपूर्ण इतिहास से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप देने वाली यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदेश की अनमोल विरासत को सहेजने का मजबूत माध्यम बनेगी।








