भावना ठाकुर,
26 अगस्त / सोलन।
गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हुए एक विशेष एवं भव्य प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविधता में एकता तथा विभिन्न राज्यों की लोकपरंपराओं को प्रदर्शित करते हुए ओणम एवं रक्षाबंधन के पर्व को अत्यंत हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया।

विशेष प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति की विविध एवं मनमोहक झलक प्रस्तुत की। ओणम के माध्यम से केरल की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन, जबकि रक्षाबंधन के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह एवं पारिवारिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। दोनों पर्वों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति और पहचान है।
कक्षा छठी से नौवीं तक के विद्यार्थियों ने इस विशेष अवसर पर मनमोहक नृत्य, मधुर गीत, प्रभावशाली भाषण एवं आकर्षक रूप-सज्जा के माध्यम से प्रस्तुतियाँ देकर समारोह में चार चाँद लगा दिए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में विभिन्न राज्यों की वेशभूषा, संस्कृति, परंपराओं एवं पर्वों की सुंदर झलक देखने को मिली। प्रस्तुतियों ने न केवल उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत से भी परिचित करवाया।
कार्यक्रम के दौरान ओणम एवं रक्षाबंधन के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रेम, भाईचारे, सौहार्द, परस्पर सम्मान तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की मूल भावना के अनुरूप यह आयोजन विभिन्न संस्कृतियों को समझने, उनका सम्मान करने और उन्हें एक सूत्र में पिरोने का सुंदर प्रयास रहा।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सागरिका बख्शी ने विद्यार्थियों की शानदार एवं सराहनीय प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं, वेशभूषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों का देश है, फिर भी इसकी आत्मा एक है। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय पर्वों एवं परंपराओं के महत्व को समझने तथा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सदैव संजोकर रखने के लिए प्रेरित किया।
यह विशेष प्रार्थना सभा विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, मनोरंजक एवं प्रेरणादायक रही। कार्यक्रम ने विद्यालय में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और ‘विविधता में एकता’ की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया तथा विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।








