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फेफड़ा कैंसर मरीजों को सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदनशील देखभाल की जरूरत : कुमारहट्टी में जागरूकता अभियान

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– महर्षि मार्कण्डेश्वर मेडिकल कॉलेज में विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस मनाया, ‘साथ मिलकर यात्रा तय करने’ का संकल्प


भावना ठाकुर,

01 अगस्त / कुमारहट्टी (सोलन)।

Jeevan Ayurveda Clinic

महर्षि मार्कण्डेश्वर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आज विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के अवसर पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “आइए, साथ मिलकर इस यात्रा को तय करें (Let’s Go Through Together)” के अनुरूप इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फेफड़ा कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ रोगियों के जीवन में प्रशामक चिकित्सा (पैलिएटिव केयर) और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रोफेसर (डॉ.) राजेश कश्यप (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग) ने अपने संबोधन में कहा कि फेफड़ा कैंसर का उपचार केवल बीमारी को खत्म करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना कि बीमारी का इलाज। पैलिएटिव केयर मरीज की शारीरिक पीड़ा, सांस की तकलीफ और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है।” उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जीवन के अंतिम पड़ाव तक हर मरीज़ को सम्मान (Dignity), सहानुभूति और आरामदायक देखभाल (Comfort Care) मिलनी चाहिए।

डॉ. कश्यप ने आगे बताया कि पुनर्वास के माध्यम से मरीज की शारीरिक क्षमता, फेफड़ों की कार्यक्षमता और दैनिक गतिविधियों को करने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने फेफड़ा कैंसर के प्रभावी इलाज के लिए चिकित्सकों, पल्मोनोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और मनोवैज्ञानिकों के समन्वित प्रयासों को अत्यंत आवश्यक बताया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. गर्गी (सहायक आचार्य) और डॉ. सर्वेश ने फेफड़ा कैंसर के कारणों, प्रमुख लक्षणों, आधुनिक जांच विधियों तथा उपचार पद्धतियों पर विस्तृत वैज्ञानिक व्याख्यान दिए। उन्होंने विद्यार्थियों के विभिन्न सवालों के जवाब भी दिए और पैलिएटिव केयर तथा पुनर्वास के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) रवि शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेडिसिन विभाग की इस सराहनीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल मेडिकल छात्रों और समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील और मरीज़-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा को भी बढ़ावा देते हैं। कुलपति जी ने डॉ. दीपक कालरा, डॉ. मोहन (पल्मोनरी मेडिसिन विभाग) तथा डॉ. मनदीप (फिजियोथेरेपी विभाग) को उनके उत्कृष्ट व्याख्यानों के लिए विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने आधुनिक उपचार, श्वास संबंधी व्यायाम तथा बहु-विषयक उपचार (Multidisciplinary Care) पर अपने विचार साझा किए।

इस जागरूकता अभियान में एमबीबीएस, स्नातकोत्तर, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों और चिकित्सकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने फेफड़ा कैंसर के विरुद्ध शीघ्र निदान, समग्र उपचार, प्रशामक चिकित्सा और पुनर्वास को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।

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