भूपेंद्र ठाकुर,
22 जुलाई / शिमला।
शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि नीट परीक्षा में अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार ने तत्काल सख्त कदम उठाए। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, दोषियों की गिरफ्तारी हुई, कानून के तहत कार्रवाई की गई और पुनर्परीक्षा भी कराई गई। अब पुनर्परीक्षा का परिणाम भी घोषित हो चुका है तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई जारी है। दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी। केंद्र सरकार ऐसे प्रावधान कर रही है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो सकें। इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती है।

दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार ने पेपर लीक के मामले में सीबीआई द्वारा जिम्मेदार ठहराए गए अधिकारियों को पुरस्कृत किया। सीबीआई द्वारा कार्रवाई की संस्तुति किए जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट को दबाया गया। जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे, उन्हें जिम्मेदारी तय करने के बजाय महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया।
जय राम ठाकुर ने कहा कि हालिया पुलिस भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक के साक्ष्य सामने आए, मनी ट्रेल तक पकड़ी गई, लेकिन सरकार ने मामले को दबाने का प्रयास किया। मास चीटिंग के आरोप लगे। आरोप लगाने वाले छात्रों ने पूरी घटना का विवरण बताया, लेकिन सरकार ने एक बार भी उनकी बात नहीं सुनी। इसके बाद वह पेपर लीक के नाम पर राजनीति कर रही है। यह शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को युवाओं के नाम पर राजनीति करने से पहले हिमाचल के मुख्यमंत्री से जवाब मांगना चाहिए कि आखिर पेपर लीक के मामलों में दोषियों को बचाने का प्रयास क्यों किया गया। जो सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देती है, उसे नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नीट के मुद्दे पर युवाओं को भड़काकर और अराजकता फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। देश की राजधानी में आगजनी, हिंसा और अराजकता फैलाकर कांग्रेस सिर्फ राजनीति कर रही है, क्योंकि जब भी कांग्रेस सत्ता में रहती है, तो न पेपर लीक को रोक पाती है और न ही उसे रोकने के गंभीर प्रयास करती है। कांग्रेस के बड़े नेताओं के उस समय के बयान हर जगह वायरल हैं। उनसे ही स्पष्ट हो जाता है कि सत्ता में रहते समय पेपर लीक पर उनकी क्या नीति थी। जबकि केंद्र सरकार ने कानून के दायरे में रहकर पारदर्शी और सख्त कार्रवाई की।








