भूपेंद्र ठाकुर,
14 जून / शिमला।
जिला पुलिस की प्रभावी अन्वेषण एवं अदालत में सुदृढ़ पैरवी का परिणाम यह हुआ कि दो अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
पहला मामला (पॉक्सो):
पहले मामले में महिला पुलिस थाना/बाल संरक्षण इकाई (FMPS/BCS) शिमला में एफआईआर संख्या 24/2024 दिनांक 05 दिसंबर 2024 के तहत आरोपी शंकर लाल पुत्र स्वर्गीय श्री चरण दास, निवासी ग्राम कुईयारू, डाकघर देवनगर, तहसील एवं जिला शिमला पर धारा 64(2)(m), 65, 351(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं धारा 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस ने गहन विवेचना के बाद अदालत में साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट (रेप/POCSO), शिमला ने आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे धारा 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत 25 वर्ष का कठोर कारावास और ₹20,000 का जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
दूसरा मामला (एनडीपीएस):
दूसरे मामले में पुलिस थाना ठियोग में एफआईआर संख्या 171/2019 के तहत आरोपी सुरेश कुमार पुत्र श्री नारायण दास, निवासी ग्राम पटागण, डाकघर पनोगी, तहसील कोटखाई, जिला शिमला पर धारा 18 और 29 एनडीपीएस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

विवेचना में जुटाए साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर माननीय विशेष न्यायाधीश, सीबीआई न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए 18 माह का कठोर कारावास और ₹15,000 का जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
जिला शिमला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह गंभीर अपराधों में प्रभावी अन्वेषण एवं सफल अभियोजन के लिए प्रतिबद्ध है, और अपराधियों को कानून के तहत दंड दिलवाने के लिए निरंतर कार्यरत है।








