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कर्नल संजय शांडिल का बढ़ता राजनीतिक कद: कंडाघाट नगर पंचायत फिर बनी पंचायत

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भूपेंद्र ठाकुर, सोलन।

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सोलन निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता कर्नल संजय शांडिल का राजनीतिक ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। कंडाघाट नगर पंचायत को डी-नोटिफाई (अधिसूचना रद्द) कराने में उनकी भूमिका को स्थानीय राजनीति में मील का पत्थर माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने न केवल क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ को मजबूत किया है, बल्कि शांडिल को भाजपा के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में स्थापित कर दिया है।

कंडाघाट का मुद्दा और कर्नल की अहम भूमिका

कंडाघाट नगर पंचायत का दर्जा वापस पंचायत में बदले जाने की मांग क्षेत्र का एक पुराना और संवेदनशील मुद्दा रहा है। कर्नल संजय शांडिल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और आम जनता से किए गए अपने वादे को निभाया। उनके नेतृत्व में कंडाघाट के लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की, जिसके ठोस परिणाम सामने आए। सरकार ने फैसला लेते हुए कंडाघाट नगर पंचायत का दर्जा घटाकर पंचायत कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। इस मुद्दे को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद क्षेत्र में कांग्रेस का जनाधार और मजबूत हुआ। हाल ही में, कर्नल शांडिल ने कंडाघाट में भाजपा के करीब 70 से 80 कार्यकर्ताओं और नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराकर विपक्षी शिविर में हलचल मचा दी थी। यह घटनाक्रम सोलन विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़ती स्वीकार्यता का स्पष्ट संकेत है।

‘भविष्य के नेता’ के रूप में उभर रही छवि

कर्नल संजय शांडिल को अब सोलन की जनता ‘भविष्य के नेता’ के रूप में देखने लगी है। उनकी साफ और स्वच्छ छवि उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच उनकी कार्यशैली काफी लोकप्रिय है। आम जनता का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जमीनी स्तर पर काम करवाने के लिए उनके पास पहुंचता है, तो कर्नल शांडिल तुरंत संबंधित अधिकारी से फोन पर बातचीत कर समस्या का मौके पर ही समाधान करवा देते हैं। यह त्वरित और प्रभावी कार्यप्रणाली सोलन निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को काफी प्रभावित कर रही है।

भाजपा के लिए बढ़ी मुश्किलें

सोलन विधानसभा सीट पर भाजपा के लिए जीत का सूखा पिछले 15 वर्षों से जारी है। डॉ. राजीव बिंदल के इस निर्वाचन क्षेत्र से जाने के बाद से भाजपा को लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल के बाद अब कर्नल संजय शांडिल को इस सीट पर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

कर्नल संजय शांडिल का बढ़ता कद और कंडाघाट नगर पंचायत जैसे अहम मुद्दे पर उनकी सफलता ने भाजपा के सामने न सिर्फ संगठनात्मक बल्कि जनाधार से जुड़ी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों की नजर से देखा जाए तो फिलहाल सोलन का राजनीतिक पारा कांग्रेस के पक्ष में तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है, जिसमें कर्नल संजय शांडिल की अहम भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है।

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