Home कल्चर पद्मश्री विद्यानंद सरैक के निर्देशन में ‘राहु रो रीण’ का मंचन

पद्मश्री विद्यानंद सरैक के निर्देशन में ‘राहु रो रीण’ का मंचन

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-बेठू प्रथा की पीड़ा को मंच पर उतारता ‘राहु रो रीण’

-आसरा संस्था ने किया ‘राहु रो रीण’ लोकनाट्य का मंचन

संवाददाता/सिरमौर।

आसरा संस्था के प्रभारी एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोककलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि हाब्बी मानसिंह कला केंद्र, जालग, पझौता में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत आसरा संस्था के गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक के कुशल निर्देशन में तैयार किए गए लोकनाट्य “राहु रो रीण” का प्रभावशाली मंचन किया गया।

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पद्मश्री विद्यानंद सरैक द्वारा लिखित “राहु रो रीण” उपन्यास की कथा एवं कथानक पर आधारित यह प्रस्तुति करियाला शैली के झूलणे स्वांग की परंपरा में तैयार की गई एक सशक्त एवं मार्मिक नाटिका है। इस लोकनाट्य में झूलणा स्वांग और गराल्टू झूरी जैसी सिरमौर की विलुप्तप्राय लोक विधाओं के अभिनय का समावेश कर इसे सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध एवं विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया गया है।

यह लोकनाट्य प्राचीन समय की बेठू प्रथा की सत्य घटना पर आधारित एक कथा को प्रदर्शित करती है। यद्यपि इसके पात्र एवं स्थान काल्पनिक हैं, तथापि इसकी संवेदना उस सामाजिक बुराई की सच्चाई को उजागर करती है, जो एक समय सिरमौर सहित अनेक क्षेत्रों में विद्यमान थी।

लोकनाट्य के माध्यम् से यह दर्शाया गया है कि शोभू के परदादा द्वारा लिया गया मात्र सौ रुपये का ऋण पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्याज के बोझ तले बढ़ता गया, जिसके परिणामस्वरूप उसके परदादा से लेकर चौथी पीढ़ी में स्वयं बालक शोभू तक को भी मधु ठाकुर के यहां बेठी बनकर श्रम करना पड़ा। देश की स्वतंत्रता के पश्चात जब बंधुआ मजदूरी की कुप्रथा का अंत हुआ तब मिसरू लाला जैसे सजग एवं संवेदनशील व्यक्ति ने मधु ठाकुर को यह बोध कराया कि किसी को बंधुआ बनाए रखना एक गंभीर अपराध है। उसने शोभू का ऋण चुका कर उसे अपनी दुकान में सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया, जिससे शोभू को बेठू प्रथा की जंजीरों से मुक्ति मिली और उसके जीवन में नया सवेरा आया।

इस प्रस्तुति में मुख्य भूमिका संदीप, चमन, रामलाल, गोपाल, सरोज, अनु एवं बिमला ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ निभाईं। साथ ही चिरंजी लाल, सुनील, अमीचंद, दिनेश, रवि, मुकेश एवं मनमोहन सहित अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने पात्रों को उत्कृष्ट अभिनय के माध्यम् से जीवंत किया।

संगीत पक्ष में संदीप ने ढोलक ने रविदत्त ने करनाल सोहनलाल ने शहनाई ने विद्या दत्त ने बांसुरी और ओम प्रकाश ने नगाड़ा वादन में अपनी सुर-साधना से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। इसके अतिरिक्त लोक कलाकारों के साथ हेमलता, मंगेश, प्रीति एवं रेखा आदि ने भी अपनी सहभागिता से लोकनाट्य प्रदर्शन में अपनी भूमिका निभाई।

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