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एकीकृत ई-गवर्नेंस पहलों से डिजिटल सुशासन की दिशा में अग्रसर हिमाचल प्रदेश सरकार

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भूपेंद्र ठाकुर,

25 अक्टूबर / शिमला।

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से डिजिटल सुशासन को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुदृढ़ करने और जनसेवाओं की उपलब्धता को सुगम बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण पर्वतीय प्रदेश हिमाचल में डिजिटल माध्यमों का विस्तार विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इससे दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।


प्रदेश में डिजिटल प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी कामकाज की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इसी दिशा में वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) पोर्टल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से मूल्यांकन, समीक्षा और स्वीकृति की प्रक्रिया ऑनलाइन सम्पन्न की जा सकती है। वार्षिक कार्य योजनाओं तथा निर्धारित लक्ष्यों को इससे जोड़ने के कारण कार्य निष्पादन की निगरानी और अधिकारियों की जबावदेही तय करने में भी सहायता मिलती है। इसके साथ ही बैठक प्रबंधन प्रणाली ने बैठकों के आयोजन, सूचना जारी करने, कार्रवाई दर्ज करने और निर्णयों के अनुपालन की निगरानी को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया है।
ऑटोमेटेड रिमाइंडर, कार्य आवंटन तथा कार्रवाई रिपोर्ट जैसी सुविधाएं विभागों को निर्धारित समयसीमा में निर्णयों पर अमल करने के लिए प्रेरित करती हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों में समयबद्धता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है।
कागजरहित प्रशासन की अवधारणा को आगे बढ़ाने में दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली (डीएमएस) भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इस प्रणाली के माध्यम से सरकारी दस्तावेजों का डिजिटल स्टोरेज, पुनः प्राप्ति और प्रबंधन संभव हुआ है। कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सुविधाओं के अंतर्गत दस्तावेजों का सारांश तैयार करने तथा संदर्भ और प्रमुख शब्दों के आधार पर आवश्यक जानकारी खोजने की क्षमता अधिकारियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रही है। लंबे दस्तावेजों में से महत्वपूर्ण तथ्यों को कम समय में प्राप्त करने से निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी है। साथ ही, भौतिक अभिलेखों पर निर्भरता कम होने से कार्यालयी कार्यों में सुविधा हो रही है और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।
नागरिकों की समस्याओं के समाधान और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन-1100 एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य कर रही है। यह व्यवस्था नागरिकों को अपनी शिकायतें दर्ज करवाने, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके निवारण की स्थिति पर निगरानी रखने की सुविधा प्रदान करती है। इस प्रणाली के साथ 93 विभागों के 10,000 से अधिक अधिकारियों को जोड़ा गया है, जिससे शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी निर्धारित करने और नियमित अनुवर्ती कार्रवाई करने में सहायता मिल रही है। व्हाट्सऐप आधारित चौटबॉट सुविधा के विस्तार से नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज करवाना और संबंधित जानकारी प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक बन रहा है। इस प्रकार, डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकार और जनता के बीच संवाद को बेहतर बनाने तथा शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश में विभिन्न सरकारी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध करवाने के उद्देेश्य से हिमसेवा पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन, आवेदन प्रक्रिया की निगरानी, दस्तावेजों के सत्यापन, भुगतान और सेवाओं की उपलब्धता जैसी सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध करवाने से नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम करने और प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने में मदद मिल रही है। हिमसेवा 2.0 का विकास तथा कृत्रिम मेधा आधारित दस्तावेज सत्यापन में प्रस्तावित सुधार इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वहीं, हिमएक्सेस राज्य का सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) और डिजिटल पहचान मंच है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता एक साझा प्रमाणीकरण व्यवस्था के जरिए विभिन्न सरकारी एप्लीकेशन तक पहुंच बन रही हैं। इससे प्रत्येक एप्लीकेशन के लिए अलग-अलग लॉगिन विवरण याद रखने की आवश्यकता कम होती है और डिजिटल सेवाओं का उपयोग अधिक सुविधाजनक बन रहा है।
डिजिटल सुशासन के साथ-साथ कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी राज्य सरकार तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इसी क्रम में 25 जनवरी, 2025 को शुरू किया गया हिमपरिवार पोर्टल हिमाचल प्रदेश की एकीकृत परिवार एवं सामाजिक रजिस्ट्री के रूप में विकसित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न सरकारी प्रणालियों में उपलब्ध परिवारों और व्यक्तियों से संबंधित सूचनाओं को एकीकृत कर कल्याणकारी योजनाओं के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना है। पोर्टल के माध्यम से ई-केवाईसी, लाभार्थियों का सत्यापन, सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों का संकलन तथा विभागीय डेटाबेस के साथ सूचनाओं का एकीकरण किया जा सकता है। इससे पात्र लाभार्थियों की पहचान करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और रिकॉर्ड में दोहराव की समस्या को कम करने में सहायता मिलती है। एकीकृत और व्यवस्थित आंकड़ों की उपलब्धता से सरकारी योजनाओं के लाभ लक्षित परिवारों तक पहुंचाने तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।


हिमाचल प्रदेश में डिजिटल शासन की ये पहलें प्रशासनिक सुधारों को तकनीक से जोड़ने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। अधिकारियों के कार्य निष्पादन की निगरानी, कागजरहित कार्यालयी व्यवस्था, शिकायतों का समयबद्ध निवारण, एकीकृत डिजिटल सेवाएं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए समन्वित आंकड़ा प्रबंधन, इन सभी क्षेत्रों में डिजिटल प्रणालियां प्रशासन को अधिक सक्षम बनाने में योगदान दे रही हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाना सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इन पहलों के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने तथा नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध करवाने पर बल दिया जा रहा है। तकनीक आधारित इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है, जिसमें दक्षता, सुगमता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता सुनिश्चित होगी।

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