Home कल्चर कक्षा से खेत तक पहुंची पढ़ाई: कृषि की नई राह से रूबरू...

कक्षा से खेत तक पहुंची पढ़ाई: कृषि की नई राह से रूबरू हुए जिला सिरमौर के विद्यार्थी

5
0

भूपेंद्र ठाकुर,

10 सितंबर / शिमला।

Jeevan Ayurveda Clinic

डॉ‌ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय, एवं उच्चतर शिक्षा निदेशालय, शिमला द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जिला सिरमौर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को बागवानी, उद्यान प्रबंधन, पुष्प उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से व्यावहारिक रूप से परिचित करवाना तथा उनके ज्ञान एवं कौशल का विकास करना रहा।

कार्यक्रम में जिला सिरमौर के 10 विद्यालयों (वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खूड, कोटला बड़ोग, सैंज, बसांहा, चांदनी, जामू कोटी, करोग, हलां, मिलां तथा करोग) से 142 विद्यार्थियों के साथ उनके अध्यापकों एवं प्रभारी शिक्षकों ने भाग लिया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम 7 सितंबर से शुरू हुआ। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को हाई-टेक फ्लोरीकल्चर, आधुनिक सिंचाई प्रणालियों, प्राकृतिक खेती, जीवामृत एवं घनजीवामृत, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन, संरक्षित खेती, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन, आधुनिक पौधशाला तकनीक, फल फसलों में प्रवर्धन तथा प्लांट टिश्यू कल्चर जैसे विषयों पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न कृषि एवं बागवानी आधारित इकाइयों का एक्सपोजर विजिट कर इन तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि आधुनिक कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी नवाचार, मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण, उद्यमिता एवं रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालयों के अध्यापकों, प्रभारी शिक्षकों एवं कार्यक्रम समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ मीनु गुप्ता एवं डॉ मनिका तोमर तथा प्रशिक्षण संयोजक डॉ प्रीति शर्मा ने संबंधित विद्यालयों एवं प्रतिभागियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता, कार्यक्रम की समयबद्धता, एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था तथा विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया तथा विशेषज्ञों एवं विद्यालयों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया। विद्यालयों के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों के साथ रहकर उनकी गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित की और प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को विद्यालय स्तर पर आगे बढ़ाने का भी आश्वासन दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here