हिमाचल समय न्यूज़,
10 सितंबर / मंडी।
औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय थुनाग स्थित गोहर (गुडैहरी) द्वारा राजकीय फार्मेसी कॉलेज, सराज के सहयोग से आज कॉलेज कैंपस में ‘आयुर्वेद और फार्मेसी में गैर-लकड़ी वन उत्पाद (एनटीएफपी) की एकीकृत भूमिका’ पर एक संवादात्मक सत्र (इंटरैक्टिव सेशन) आयोजित किया।
महाविद्यालय के डीन के मार्गदर्शन में और दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत संवाद के हिस्से के रूप में आयोजित इस सत्र में राजकीय फ़ार्मेसी कॉलेज, सराज के निदेशक-सह-प्राचार्य प्रो. राजू एल. ने विशेषज्ञ-सह-स्रोत व्यक्ति के तौर पर भाग लिया।

उन्होंने बीएससी फॉरेस्ट्री के छात्रों के साथ संवाद के दौरान उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में एनटीएफपी और कच्ची औषधीय पौधों की दवाओं के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने पौधों के विभिन्न हिस्सों जैसे जड़, छाल, पत्ते, फूल, बीज और रेज़िन इत्यादि से मिलने वाले इन उत्पादों के सही उपयोग और इनके प्रयोगशाला प्रसंस्करण पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों को लकड़ी के अलावा जंगलों से मिलने वाले विभिन्न उत्पादों और उनके औषधीय उपयोग के बारे में उपयोगी जानकारी है। इनमें दवाओं में उपयोग होने वाली कशमल (बर्बेरिस) की जड़ें, ठंडक देने के लिए बुरांश (रोडोडेंड्रोन आर्बोरियम) के फूल का रस, बासोल (टैक्सस बैकाटा) के एंटी-कैंसर गुण, हल्दी के एंटी-माइक्रोबियल गुण और किडनी की पथरी निकालने और पीलिया ठीक करने के लिए भुई आंवला (फाइलैंथस निरुरी) का उपयोग शामिल है।
इस ज्ञानवर्धक सत्र के दौरान छात्रों को कम से कम एक औषधीय पौधा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि वे उसके बारे में सीख सकें और यह जानकारी दूसरों के साथ साझा कर सकें। डॉ. राजू ने छात्रों को स्थानीय समुदाय की मदद करके उनके एनटीएफपी को व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करने और उससे आय बढ़ाने में योगदान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्रोफेसर (वन उत्पाद) डॉ. वंदना धीमान ने किया।








