– कहा, मुख्यमंत्री जैसे ही दिल्ली रवाना हुए तो सत्र में बिल्कुल भी गंभीरता नहीं दिखी
भूपेंद्र ठाकुर,
03 सितंबर / शिमला।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा सत्र के समापन के बाद अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से हमने संजीदगी के साथ जनहित के मुद्दों को विधानसभा के इस मानसून सत्र में उठाने का प्रयास किया है। भाजपा ने सार्थक विषयों पर चर्चा चाही और प्रस्ताव भी लाये लेकिन हमारी जनता के मुद्दे ईमानदारी से उठाने के बाबजूद सरकार की तरफ से संतोषजनक जवाब सदन में नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे ही दिल्ली रवाना हुए तो सत्र में बिल्कुल भी गंभीरता नहीं दिखी। अधिकारी दीर्घा खाली रही और केवल एक दो जुनियर अधिकारी ही दिखे और कोई वरिष्ठ अधिकारी सदन में नहीं था। ये हालात बताते हैं कि अब अधिकारी भी समझ गए हैं कि हम चुनावी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार में तो अफरा तफ़री का माहौल बना हुआ ही है लेकिन अधिकारियों में भी अब खलबली मची हुई है। मुख्यमंत्री के बाद मंत्री भी दिल्ली भाग गए लगता है कुछ तो बड़ा होने वाला है। आज तक जितने भी बड़े बिल इस सरकार ने सदन में लाये हैं उन्हें हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है जो सरकार की नालायकी बताने के लिए काफी है। आपदा के बाद करोड़ो रुपए की वन संपदा नदियों नालों से अवैध ढंग से निकाली गई और करोड़ो का राजस्व नुकसान सरकार को हुआ लेकिन ये किसके कहने और करने से हुआ वो बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री जिम्मेवारी लेने से भाग रहे हैं। मन्त्रियों से जवाब देते नहीं बन रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री के बीच तालमेल नहीं है। ये पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए खुद संवैधानिक पद पर होने के बावजूद धरने प्रदर्शन में तख्ती लेकर उतर आये। हम भी पांच साल मुख्यमंत्री रहे लेकिन मैंने कभी ऐसे सड़क पर बैठकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे और गालियाँ नहीं निकाली। मुख्यमंत्री को अपने पद के अनुरूप ऐसा करने से बचना चाहिए था। सदन में रोजगार से संबंधित विषय को लेकर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखी। कहा था हम पांच साल में पांच लाख सरकारी और पक्की पेंशन वाली नौकरी देंगे लेकिन सरकारी आंकड़े इसके गवाह हैं कि हिमाचल में 1.91 में से अब केवल एक लाख 75 हजार ही नौकरी रह गई है। नए रोजगार के अवसर खत्म कर दिए गए हैं। हिम केयर, सहारा, गृहणी और स्वावलम्बन जैसी भाजपा सरकार के समय की लोकप्रिय योजनाएं राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से बंद कर दी हैं।








