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नौणी विश्वविद्यालय ने किसानों को मूल्य संवर्धन और एग्रीबिज़नेस कौशल से किया सशक्त

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डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कृषि प्रसंस्करण को एक लाभदायक आर्थिक गतिविधि बनाना और कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देना’  विषय पर दो प्रशिक्षण कार्यक्रमों

हिमाचल समय, सोलन, 13 सितंबर ।

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कृषि प्रसंस्करण को एक लाभदायक आर्थिक गतिविधि बनाना और कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देना’  विषय पर दो प्रशिक्षण कार्यक्रमों

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का आयोजन किया। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम सोलन जिले की सलोगड़ा पंचायत और सिरमौर जिले की रजाना पंचायत में आयोजित किए गए।

इसमें कुल 60 (प्रत्येक पंचायत से 30) प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY-RAFTAAR) के तहत आयोजित किए गए।

सत्रों के दौरान विभाग के वैज्ञानिकों ने स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की उद्यमशीलता और तकनीकी कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

प्रशिक्षण का मुख्य फोकस कृषि और बागवानी से प्राप्त स्थानीय उत्पादों में मूल्य संवर्धन पर रहा। प्रतिभागियों को खाद्य संरक्षण की वैज्ञानिक विधियों, 

आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों, स्वच्छता संबंधी अभ्यासों, सुरक्षित पैकेजिंग मानकों और लेबलिंग आवश्यकताओं की जानकारी दी गई।

व्यावहारिक प्रदर्शन में बुरांश स्क्वैश, कीवी बार, जैम, अचार, चटनी आदि उत्पादों की तैयारी शामिल रही, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण और FSSAI मानकों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। विभाग के वैज्ञानिकों ने बताया कि

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फलों, सब्जियों, अनाज, दालों और दूध जैसे कच्चे उत्पादों में मूल्य संवर्धन से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है, बल्कि स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सकेगी।

प्रशिक्षण के समापन सत्र में उद्यमिता के अवसरों, उत्पाद ब्रांडिंग, लेबलिंग और बाज़ार संपर्क पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह ज्ञान प्रदान किया गया कि कृषि-प्रसंस्करण को कैसे एक टिकाऊ व्यावसायिक उद्यम में बदला जा सकता है।

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