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ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में हरे रंग की ड्रैस पहने आशा वर्कर को अकसर आपने देखा होगा

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#सिरमौर

ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में हरे रंग की ड्रैस पहने आशा वर्कर को अकसर आपने देखा होगा, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हम सबको स्वस्थ् रखने मेें इनका कितना योगदान है। बात शुरू करेंगे सिरमौर जिला के बनेठी प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्र में तैनात आशा कार्यकर्ता किरण बाला ठाकुर से। किरण बाला बीते पांच वर्षो से बनेठी पीएचसी के तहत आने वाले छामला, कालथ व बाेहल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कोरोना काल में जब हम सब घर से बाहर निकलने से भी डर रहे थे तो वह तीन से पांच किलोमीटर दूर जाकर कोरोना के सैंपल एकत्रित करती थी।छामला व आसपास के क्षेत्रों में सड़क सुविधा नहीं है। घने जंगल से होकर गुजरना इनका दिनचर्या है। बेहद दुगर्म रास्तों से होकर यह क्षेत्र के 784 लोगों को स्वास्थ्य सुविधांए मुहैया करवा रही हैं। जंगली जानवरों का डर मन में हमेशा बना रहता है, लेकिन अपने कर्तव्य से कभी पीछे नही हटी। किरन बाला ने संस्थान गत डिलिवरी करवाने में भी रिकार्ड बनाया है। अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में वह करीब 80 संस्थानगत डिलिवरी करवाने के लिए महिलांओं को जागरूक कर चुकी हैं। बेहद दुगर्म क्षेत्र देवसनी में गु़र्जर बस्ती है। किरन यहां पर एक गर्भवती महिला के लिए पांच करीब

किलाेमीटर पैदल चलकर जाती थी और उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधांए मुहैया करवाई। कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में भी आशा वर्कर का अहम योगदान रहा है। लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए घर-घर जाकर जागरूक किया। गर्भवती महिलांओं को आयरन, कैल्शियम व अन्य दवाईयां घर पर जाकर मुहैया करवाना इनकी डयूटी में शामिल हैं। अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए किरन को दो बार पालतु कुत्तों ने भी काटा है। इन तमाम दिक्कतों के बीच आशा वर्कर के काम में कोई कमी नहीं निकाल सकता।तो चलीए अब बात करते हैं सरकार इन्हें क्या आर्थिक सहायता दे रही है।आशा वर्कर को 2700 रुपए प्रतिमाह दिए जाने की घोषणा की गई थी जिसमें से 2000 रुपए ही फिलहाल मिल रहे हैं। कोरोना सैंपल एकत्रित करने के लिए सरकार ईन्हें 165 रुपए प्रति सैंपल देती हैं। इसके आलावा कुछ अतिरिक्त लाभ सफल डिलिवरी करवाए जाने पर मिलते हैं। यानि औसतन 4 से 6 हजार रुपए प्रत्येक माह मिल रहे हैं। यह भी नियमित रूप से नहीं मिलते। यह कहानी केवल किरन बाला की नहीं है, बल्कि प्रदेश की तमाम आशा वर्कर की है जो अपनी जान जोखिम में डाल कर बेहद दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाए प्रदान कर रही है। सरकार यदि आशा वर्कर को बेहतर मानदेय देती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवांए और अधिक बेहतर हो सकती हैं। आशा वर्कर ही ऐक ऐसा वर्ग है जो घर-घर जाकर स्वास्थ्य सबंधि सुविधांए दे रहा है।

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