सोफत की कलम से.........

सोफत की कलम से.........

#सोलन

कोरोना ने एक योग्य वकील और एक अच्छे इंसान को हमसे छीन लिया। मंगलवार को हिमाचल बार काउन्सिल के चार बार अध्यक्ष रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत का निधन हो गया। वह कोरोना के उपचार के लिए आई जी एम सी शिमला मे भर्ती किए गये थे। जानकारी के अनुसार हालांकि उनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आ गया था लेकिन उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आई सी यू मे रखा हुआ था, जहां उनका निधन हो गया। रमाकांत जी हमारे सोलन जिला के दून निर्वाचन क्षेत्र के तहत पहाड़ी क्षेत्र से संबंध रखते थे। यह सोलन जिला का दूर-दराज क्षेत्र है। ऐसे क्षेत्र से निकल कर शिमला की बार मे अपनी जगह बनाना बड़ी बात है। वह योग्य वकील के साथ सिद्धांतवादी व्यक्तित्व के भी मालिक थे।

दुर्भाग्य से मेरा अपने पुराने दोस्त के साथ शिमला हाईकोर्ट मे विवाद चल रहा है। मुकदमे के बीच ही मेरी एडवोकेट हिमाचल कोर्ट की जज के रूप पदोन्नत हो गई। अब मुझे नये वरिष्ठ वकील की आवश्यकता थी। मेरी पहली पसंद रमाकांत थे। मै अपने वकील के साथ उनसे मिलने गया। जैसे ही मैंने उनसे यह बताया की मेरा विवाद दुर्भाग्य से मेरे अपने ही पुराने दोस्त से चल रहा है, उन्होंने मुझे कहा सोफत साहब मै माफी चाहूँगा कि मै आपका यह केस नहीं कर पांऊगा। असल मे वह हम दोनों दोस्तों के बीस वर्ष पूर्व एक केस मे वकील रह चुके थे। उस समय उस केस मे हम दोनों एक पक्ष थे। उन्होंने कहा कि मै आप ही के कारण आपके इस मुकदमे मे आपके प्रतिद्वंदी को जानता हूँ। सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने भी मुझे वकील बनने के लिए सम्पर्क किया था। मैंने उन्हे यह कह कर उनका केस लेने से इन्कार कर दिया था कि क्योंकि मै सोफत जी का वकील भी रह चुका हूँ और वह मेरे दोस्त भी है। साथ ही रमाकांत जी ने यह भी बताया कि मैने उनसे यह भी वायदा किया है कि मै आपका वकील भी नहीं बंनूगा। वह बातचीत करते हुए बार-बार माफी मांग रहे थे और नम्रता से केस लेने से इन्कार कर रहे थे।

वकालत की उच्च परम्परा और मर्यादा यही कहती है कि जिसके पक्ष मे आपने कभी केस लड़ा है फिर उसके विरुद्ध आपको केस नहीं लड़ना चाहिए। हालांकि ऐसी परम्परा का पालन करने वाले आज के समय मे बहुत कम लोग है, परन्तु रमाकांत जी ने ऐसा करके मेरे मन मे जो आदर उनके प्रति था उसे और बढ़ा दिया। पिछले कल जैसे ही उनके निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ यह सारी बात और घटना याद आ गई और मैंने आप सभी से इसे सांझा करने का निर्णय कर लिया। इस कोरोना महामारी के चलते हमने एक योग्य वकील और सिद्धांतवादी इंसान खो दिया है। मै उन्हे अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मेरी भगवान से प्रार्थना है कि प्रभु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवारजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।