सोफत की कलम से.........

सोफत की कलम से.........

#सोलन

राष्ट्रवादी होना और राष्ट्रवादी होने का दावा करने मे जमीन आसमान का अन्तर है। राष्ट्रवादी शब्द मे देश भक्ति, देश प्रेम और देश के प्रति वफादारी का समावेश है। ऐसा नहीं कि हमारे देश मे सच्चे राष्ट्रवादी नहीं है, परन्तु अधिकांश कथित राष्ट्रवादी ऐसे है जिनका राष्ट्रवाद तब तक है जब तक उनका अपना स्वार्थ आड़े नहीं आता, पर इस दुनिया का इजराइल नाम का छोटा सा देश अपवाद है। पुरा देश राष्ट्रवादी और अपने देश के स्वाभिमान के लिये लड़ने मरने के लिए तैयार है। वहां की 2019 की गणना मे आबादी लगभग 92 लाख बताई जाती है। इजराइल का क्षेत्रफल हमारे केरल से भी कम है। इजराइल का क्षेत्रफल लगभग 22000 वर्ग किलोमीटर है। वह विश्व का एकमात्र यहूदी देश है। उसकी अपनी कुछ ऐसी विशेषताएं है कि यह छोटा होने के बावजूद अपनी शक्ति का लोहा मनवा चुका है। उसने आज तक सात बड़े युद्ध लड़े और सभी मे विजय प्राप्त की है। फिलिस्तीन के साथ उसकी दुश्मनी जग-जाहिर है।

आजकल इजराइल फिलिस्तीनियों को सबक सिखाने मे व्यस्त है। अपने दुश्मन को दुश्मन के घर मे घुस के मारने का सबक भी इजराइल से सिखा जा सकता है। इजराइल ने खुली घोषणा कर रखी है कि यदि कोई उनके एक नागरिक की हत्या करेगा तो हम उसका बदला एक हजार को मौत के घाट उतार कर लेंगे। इजराइली जो कहते है वह करते भी है। उनके यहां हर बच्चे को मिलिट्री ट्रेनिंग करना अनिवार्य है। लड़के को तीन साल और लड़की को दो साल के लिए फौज मे सेवा देना भी अनिवार्य है। फिर यह बच्चे भले वहां के राष्ट्रपति के ही क्यों न हों। ऐसे कई उदाहरण है जब इजराइलियों ने अपने दुश्मनों को ढूंढ कर उनके देश मे ही जा कर मौत के घाट उतार दिया था। वह भारत को अपना दोस्त मानते है। भारत सरकार का उनके प्रति रवैया इस बात पर निर्भर करता है कि यहां किस पार्टी की सरकार है, परन्तु भारत के अधिकांश नागरिक इजराइल के प्रशंसक ही नहीं अपितु इजराइल से प्यार करते है और चाहते है भारत भी सैन्य शक्ति मे इजराइल का अनुकरण करें। आज इजराइल दुनिया की किसी भी मिसाइल को रास्ते मे ही नष्ट कर सकता है। गुरिल्ला लड़ाई का जनक भी इजराइल को ही माना जाता है। इजराइल हमेशा भारत की सहायता के लिए तैयार रहता है। भारतीय नागरिकों की भी वर्तमान युद्ध मे शुभकामनायें इजराइल के साथ है। यदि कोई आपको अच्छी प्रेरणा दे सकता है तो जरूर लेनी चाहिए भले वह इजराइल की तरह छोटा देश ही क्यों न हो।